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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

दुनिया में प्रसिद्धि मिलती है प्रभु भक्ति करने से :-मुनि श्री विमल सागर जी


Sanyog Jagati
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05/08 /2019
*दुनिया में प्रसिद्धि मिलती है प्रभु भक्ति करने से
-:मुनि श्री विमल सागर जी*

करेली जिला नरसिंहपुर (म.प्र.) मे

राष्ट्रहित चिंतक,सर्वश्रेष्ठ *आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज* के परम प्रभावक शिष्य 
*मुनि श्री विमलसागर जी महाराज ससंघ * श्री महावीर दिगंबर जैन बडा मंदिर करेली मैं विराजमान है* 

मुनि श्री  विमल सागर जी ने कहा कि कर्मों  की बड़ी विचित्रता है। यह मनुष्य जीवन एक खेत के समान है। भगवान की पूजन करने से 24 घंटे में जो पाप होते हैं धुल जाते हैं। पुण्य से अग्नि जल बन जाती है। तलवार माला बन जाती है। पुण्य से अतिशय हो जाते हैं। नियम के प्रभाव से पुण्य की प्राप्ति होती है। धर्म की महिमा अपरंपार है। छोटे-छोटे नियम भी ऊंचाइयों पर पहुंचा देते हैं।
मुनि श्री अचल सागर जी ने कहा कि पानी जहां जाता है
वैसे रूप में हो जाता है। नीम में जाता है तो कड़वा हो जाता है। जैसी संगति होती है वैसा परिवर्तित हो जाता है। सज्जन पुरुषों की संगति करेंगे तो वैसे हम होंगे। सज्जन की संगति में रहोगे तो सज्जन बनोगे। माता पिता का बड़ा महत्त्व होता है बच्चों को संस्कारित करने में। आप बच्चों को चॉकलेट खिला कर मांसाहार के संस्कार दे रहे हैं। आने वाली पीढ़ी के भविष्य को आपने नहीं संभाला तो आगे क्या होगा। संत समागम से जीवन महक जाता है। *आचार्य श्री विद्यासागर जी ने मूकमाटी में लिखा है कि संत समागम की यही तो सार्थकता है कि संसार का अंत दिखता है* 84 लाख योनियों से बचने का उपाय संत समागम है। गुरु महाराज के दर्शन परेशानियों से दूर हो जाते हैं।
 मुनि श्री भावसागर जी ने कहा कि  भगवान के गुणों का कीर्तन भक्ति, पूजा, आदि  करने से विघ्न नाश को प्राप्त होते हैं। कभी भी भय नहीं होता है। बाहरी शक्ति आक्रमण नहीं करती है। और निरंतर यथेष्ट पदार्थों की प्राप्ति होती  रहती है। भक्ति अमीर  गरीब सभी करते हैं। आज युवाओं को बालकों को हमने अच्छे धार्मिक संस्कार नहीं दिए तो युवा अपराध और नशे में लिप्त हो जाएंगे। इतिहास गवाह है कि जब जब भी पतन के  के क्षण उपस्थित हुए हैं तब तब उत्थान की अमर गाथाऐ भी लिखी गई हैं। दिन बा दिन सामाजिक एवं धार्मिक संकटों औरअवरोधो और हम अपनी खुली आंखों से देख रहे हैं। दुनिया में अहिंसा का शंखनाद करना है। बच्चों को  पूजन अभिषेक आहार दान आदि सिखाना चाहिए पाठशाला भी भेजना चाहिए तभी बच्चे युवा संस्कारित होंगे। दुनिया में प्रसिद्धि मिलती है प्रभु भक्ति करने से इसलिए हमेशा भक्ति करते रहें।

 

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