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आज्ञानुवर्ती संघ

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  1. What's new in this club
  2. श्री भक्तामर स्तोत्र महार्चना अनुष्ठान वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल परम पूज्य आचार्य भगवन श्री विद्यासागर महामुनिराज के आशीर्वाद एवं परम पूज्य मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से मुनिवर वीर सागर जी, विशाल सागर जी एवं धवल सागर जी महाराज के सानिध्य में भारत की राजधानी दिल्ली में 1300 मंडलों पर 65000 से भी अधिक दीपकों के साथ पहली बार आयोजित श्री भक्तामर अनुष्ठान दीप महाअर्चना का ऐतिहासिक कार्यक्रम श्री विद्या सागर यात्रा संघ जयपुर के निर्देशन में सानद संपन्न हुआ। इस आयोजन में श्रावक श्रेष्ठी जैन गौरव श्री अशोक जी - श्रीमति सुशीला जी पाटनी आर के मार्बल किशनगढ, भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष श्री भरत जी जैन मुम्बई, श्रेष्ठी श्री राजा भैया सूरत, श्री जे के जैन नेमीसागर जयपुर सहित कई गणमान्य श्रेष्ठिजनो की उपस्थिति ने आयोजन में चार चांद लगा दिए। इस विशाल आयोजन में वाचन प्रस्तुति के माध्यम से पूरे कार्यक्रम को कोर्डिनेट करने के लिए सुश्री निष्ठा जैन सुपुत्री श्री मनीष - रचना चौधरी निवासी जयपुर अध्ययनरत प्रतिभा स्थली जबलपुर को *वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए* गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से सीईओ श्री आलोक कुमार द्वारा सम्मानित किया गया। सुश्री निष्ठा जैन के इस सम्मान से पूरा जयपुर जैन समाज अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। सुश्री निष्ठा जैन व श्री विद्या सागर यात्रा संघ जयपुर के मुख्य संयोजक श्री मनीष - रचना चौधरी को हार्दिक बधाईयाँ व शुभकामनाये तथा साधुवाद LARGEST EARTHEN LAMP YAJNA The World Record of ‘largest earthen lamp yajna' has been achieved by Param pujya Acharya shree 108 Vidhya sagar ji mahraj's disciple Muni pungav shree 108 Sudha sagar ji mahraj at Delhi, India. On Dec 31, 2018; largest earthen lamp yajna with record breaking numbers of earthen lamps was performed during Shree Bhaktamar ji deep mahaarchana. Yajna was performed under guidance of Muni shree 108 Veersagar ji mahraj, Muni shree 108 Vishalsagar ji mahraj and Muni shree 108 Dhawalsagar ji mahraj. Ms. Nishtha Jain, Pratibhashali Gyanodaya Vidyapeeth, Jabalpur coordinated the program..
  3. ???????? *संत शिरोमणि आo श्री विद्या सागर जी महाराज की जय* आज 25 अगस्त 2018को सौम्य मूर्ति,पूज्य मुनि *श्री 108 श्री वीर सागर* जी महाराज के *मूक माटी* ग्रंथ पर प्रवचन का सारांश :- ➡ग्रंथ में दृश्टान्त माटी का है दृश्टा सभी जीव है। ➡सरिता जब तक तटो से बंध कर चलती है तभी अपने लक्ष्य को प्राप्त करती है।ऐसे ही व्यक्ति को धर्म,मर्यादा संयम के बंध में रहना चाहिए तभी वह सही दिशा में जा सकता है। ➡समीचीन रूप से जो प्रेषित किया जाता है उसे सम्प्रेषण कहते हैं। ➡ यदि हम किसी की मदद करना चाहते हैं तो सहकार का भाव, वात्सल्य का भाव रखना , अधिकार का भाव नही रखना। ➡ व्यक्ति ने जो चीज छोड़नी थी उसे तो सहज संजो कर रखी है, जो ग्रहण करना था उसे छोड़ कर रखा है। यही हमारा अज्ञान है। ➡किसी भी कार्य के प्रारम्भ में कठिनाई आती है चाहे वो धर्म का हो या लौकिक जीवन का। लेकिन धीरे धीरे अभ्यास से सब smooth हो जाता है। विशुद्धि बढ़ने लगती है। ➡ हे भव्य आत्माओ तुम होनहार भगवान हो, मूढ़ताओं में मत फसो। ➡ *संकेत को कारण मत मानना। शकुन शास्त्र के अनुसार यदि कोई अपशकुन हो जाता है तो वो आपके अहित का कारण नही मात्र संकेत हो सकता है। हित या अहित के मूल कारण पर जाओ और वो मूल कारण कर्म है।* जैजिनेंद्र?
  4. ♦♦विहार अप्डेट♦♦ ⭕03/07/2018 ⭕ ? संत शिरोमणि आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महायतिराज के परम प्रभावक, आज्ञानुवर्ती शिष्य ♦♦♦♦♦♦♦ ?महावीर छवि धारी मुनि श्री १०८ वीर सागर जी महाराज ?औजस्वी वाणी धारक मुनि श्री १०८ विशाल सागर जी महाराज ? वात्सल्य मूर्ति मुनि श्री १०८ धवल सागर जी महाराज ⭕(त्रय मुनिराज)⭕ आज 03/07/18 को श्री दिगम्बर जैन मंदिर गली नं 8 अशोक नगर (दिल्ली) में विराजमान है। ♻♻♻♻♻♻♻♻♻♻♻♻
  5. पूज्य मुनि श्री ससंघ बाहुबली एन्क्लेव दिल्ली में विराजमान है । जेष्ठ मुनि प्रणम्य सागर जी महाराज ससंघ के साथ दिल्ली में महती धर्म प्रभावना हो रही है।
  6. महाराज श्री राजधानी दिल्ली में विराजमान है
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