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आज्ञानुवर्ती संघ

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  1. What's new in this club
  2. मुनिश्री अभय सागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार दमोह से सिद्ध क्षेत्र श्री कुण्डलपुर जी की ओर हुआ।
  3. *भव्य मंगल प्रवेश कल* _आचार्य भगवन 108 श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य *पूज्य मुनि श्री 108 अभयसागर जी महाराज, मुनि श्री प्रभातसागर जी महाराज एवं पूज्य मुनि श्री निरीहसागर जी महाराज का मंगल प्रवेश सुबह कुंडलपुर में होगा।*_ *नववर्ष की बेला में पूज्य मुनिश्री के सान्निध्य में होगा बड़ेबाबा का भव्य अभिषेक- शांतिधारा.....* _अधिक से अधिक संख्या में कुंडलपुर पहुंचकर, इन स्वर्णिम पलो के साक्षी बन पुण्य लाभ अर्जित करें।_ 🚩 *पुण्योदय विद्यासंघ* 🚩
  4. परम पूज्य मुनिश्री अभयसागर जी मुनिराज का अपने नये उपसंघ ( अभय सागर जी, प्रभातसागर जी, निरीहसागर जी) के साथ भाग्योदय तीर्थ सागर से मंगल विहार हुआ इससे पूर्व मुनि अभयसागर जी के साथ मुनि निरीहसागर जी के स्थान पर मुनि पूज्यसागर जी विराजमान थे | नया उपसंघ मुनिश्री अभयसागर जी मुनिश्री प्रभातसागर जी मुनिश्री निरीहसागर जी पुराना उपसंघ मुनिश्री अभयसागर जी मुनिश्री प्रभातसागर जी मुनिश्री पूज्यसागर जी अभी मुनिश्री पूज्यसागर जी - मुनि श्री योगसागर जी के साथ भाग्योदय तीर्थ सागर में विराजमान हैं
  5. 19 दिसंबर 2018 परम पूज्य मुनिश्री अभयसागर जी मुनिराज का नये उपसंघ ( अभय सागर जी, प्रभातसागर जी, निरीहसागर जी) का मंगल विहार भाग्योदय तीर्थ सागर से 02:30 PM पर हो गया हैं.. आज रात्रिविश्राम- बालक काम्प्लेक्स 06km विहार दिशा- कुंडलपुर जी, दमोह
  6. 5 दिसंबर 2018 पूज्य मुनिश्री अभयसागर जी ससंघ सागर में विराजमान है |
  7. प. पू. अभय सागर जी महाराज ससंद्य का बिहार बागरोद चौराहा से हुआ आज आहारचर्या ग्राम बागरौद में होगी । कल प्रातः राहतगढ़ में होगा मंगल प्रवेश
  8. प. पू. मुनि श्री अभय सागर जी महाराज ससंघ का बिहार कुआखेड़ी से हिरनई की और
  9. परम पूज्य मुनिश्री १०८ अभयसागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार विदिशा से चातुर्मास पश्चात हुआ आज रात्रि विश्राम - हिरनई संभावित दिशा - खुरई (सागर)
  10. विदिशा में चातुर्मास कर रहे संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री अभयसागर जी मुनि श्री प्रभातसागर जी, मुनि श्री पूज्यसागर जी का पिच्छिका परिवर्तन समारोह शीतलधाम पर संपन्न हुआ! प्रवक्ता अविनाशजैन ने बताया इस अवसर पर विदिशा जिले के गंजबासौदा, मंडीबामौरा, कुरवाई, ललितपुर, अशोकनगर, वासी, तथा भोपाल मुंबई, पाटन, तथा भारत के विभिन्न नगरों के लोग उपस्थित थे| पिच्छिका परिवर्तन अशोकनगर से आये श्री दिगम्वर जैन युवा वर्ग के द्वारा संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के संयम स्वर्ण वर्ष को समर्पित होकर आचार्य श्री के जीवन चित्रण को सजीव करते हुये घटना क्रम को जोड़ा और सबसे पहले विदिशा मे परम पूज्य मुनि श्री अभय सागरजी महाराज की पिच्छिका को जीवन की एक रेल के माध्यम से लाया गया जिसे नगर के सभी बाल ब्रह्मचारियों ने स्वीकार कर उसको विमोचित कर पूज्य मुनि श्री को संयम को स्वीकार करते हुये नौ परिवारों ने पूज्य मुनि श्री के कर कमलों में भेंट की जिसे मुनि श्री ने अपनी पुरानी पिच्छी को विदिशा के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डा. सतीश चंद़ संजय जैंन किरीमौहल्ला परिवार को दी| वंही पर मुनि श्री प्रभात सागर जी महाराज की पिच्छिका को एरावत हाथी अपनी सूंड़ पर लेकर आता हैं। जिसे सभी ब्र. बहनें विमोचित कर संयमी परिवारों के द्वारा वह पिच्छिका मुनि श्री अभय सागर जी को सोंप दी जाती हैं जिसे मुनि श्री प्रभातसागर जी स्वीकार करते हैं| उसी क्रम में मुनि श्री प्रभात सागर जी की पुरानी पिच्छिका श्री कमलेश जी जैन लुहांगीपुरा के परिवार को मिलती हैं उसके पश्चात की कहानी को आगे बढ़ाते हुये आचार्य श्री के बुंदेलखंड नैनागिर के चातुर्मास की घटना को जोड़ते हें, जिसमें खूखार डाकूओं का घोडों पर आगमन नैनागिर में होता हैं, और वह पूज्य आचार्य गुरुदेव के समक्ष अपने अपराधों को स्वीकार करते हैं| एवं आगे से उन अपराधों को न करने का वचन देते हैं| और उन्ही में से श्रावकों के माध्यम से नवीन पिच्छिका प्राप्त होती हैं, जिसे पाठशाला की सभी बहने विमोचित कर संयमी परिवार को सौंप देती हैं, और वह नवीन पिच्छिका मुनि श्री अभयसागर जी महाराज मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज को सौंपते हैं और मुनि श्री की पुरानी पिच्छिका युवा मुनि सेवक श्री राहुल जैन परिवार को संयम लेंने पर दी जाती हैं| इस अवसर राष्ट़ीय कवि श्री चंद्रसेन जी जैन भोपाल ने गूरु भक्ति में अपनी कविताओं के माध्यम से उपस्थित जनता का मन मोह लिया| कार्यक्रम का संचालन श्री विजय जैन धुर्रा, एवं श्री शैलेन्द़ जैन अशोकनगर ने कहानी के माध्यम से किया इस अवसर पर श्री चातुर्मास कमेटी, श्री समवशरण विधान समिती श्री शीतलविहार न्यास, श्री सकल दि. जैन समाज समिती के पदाधिकारिओं ने अशोकनगर से जैन युवा संघ की टीम जिन्होंने श्री विजय जैन धुर्रा के नेतृत्व में जो प्रस्तुती दी एवं अशोक नगर पिच्छिका बनाकर लाने वाले युवाओं का तिलक माला एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया| इस अवसर पर श्री हृदयमोहन जैन, श्री वसंत जैन, श्री ओमप्रकाश जैन, श्री प्रद्युमन सिंघई, ने अपने उद्वबोधन में कहा कि गुरूदेव के आशीर्वाद से सभी कार्यक्रम संपन्न हुये| मुनित्रय ने अपना संक्षिप्त आशीर्वाद देते हुये कहा कि आचार्य श्री का ललितपुर आना हो रहा हैं| और हम लोगों का भी जाना हो रहा हैं, हो सकता हैं, हम लोगों का भी जाना हो सकता हैं| मुनि श्री ने कहा कि पिच्छिका परिवर्तन एक बंद कमरे में भी हो सकता हें, लेकिन यह कार्यक्रम संयमोत्सव के रुप में मनाया जाता हें| साधुओं का सानिध्य आप सभी को इसी प्रकार आशीर्वाद मिलता रहे| इसी भावना के साथ मुनि श्री ने मयूर पिच्छिका के गुणों को बताते हुये कहा कि जैसे मुनिराज का मन बहुत ही कोमल होता हैं, उसी प्रकार यह पिच्छिका भी बहुत कोमल होती हैं| इस अवसर पर समाचार पत्रों में विशेष कवरेज के लिये सभी पत्रकार बंधुओं का सम्मान भी किया गया! एवं एक प्रतियोगिता चातुर्मास के समाचारों की कटिंग फाईल भी रखी गई जिसमें प्रथम स्थान श्री सीमा विजयकुमार जैन एवं द्वितीय स्थान पर श्री मति ज्योती एवं श्री मति सुनीता उत्सव तथा तृतीय स्थान पर डॉ. आई. के. जैन रहे इसके साथ ही सांत्वना पुरस्कार सभी प्रतियोगियों को दिये गये|
  11. मुनि श्री 108 अभयसागर जी ससंघ जैन मंदिर अरिहंत विहार विदिशा (म.प्र.) में विराजमान है।
  12. पूज्य मुनि श्री ससंघ मंडी बामौरा में विराजमान है पूज्य मुनि श्री ससंघ का वहैार विदिशा के लिए होग
  13. मुनि श्री अभय सागर जी ससंघ बरुआसागर जिला झाँसी में विराजमान है।
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