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गुरुवर्य के स्वर्ण दीक्षा प्रसंग पर आचार्यश्री द्वारा रचित संपूर्ण साहित्य एवं प्राचीन आचार्यां द्वारा रचित महत्वपूर्ण ग्रंथों को प्रकाशित करने का मानस बना है। यह ग्रंथ सैट मात्र रु.11000/- की न्यौछावर राशि देकर किसी भी मंदिर, पुस्तकालय, मुनि संघ, विद्यालय को भेटकर कौण्डेश ग्वाले की तरह आचार्य कुंदकुंद बनने का स्वर्णिम अवसर भी हमें प्राप्त होने जा रहा है। आप इन ग्रंथों को अपने घर में सहेज सकते हैं। महोत्सव के प्रथम चरण में 50 एवं शेष समापन बेला में प्रकाशित करने की भावभूमि बनी है।

  1. What's new in this club
  2. जैन विद्यापीट, भाग्योदय तीर्थ, सागर, म. प्र. - 9109090111 , 9109090222
  3. गुरुवर के स्वर्ण दीक्षा प्रसंग पर आचार्यश्री द्वारा रचित संपूर्ण साहित्य एवं प्राचीन आचार्यों द्वारा रचित महत्वपूर्ण ग्रंथों को प्रकाशित करने का मानस बना था । यह ग्रंथ सैट मात्र रु.11000/- की न्यौछावर राशि देकर किसी भी मंदिर, पुस्तकालय, मुनि संघ, विद्यालय को भेटकर कौण्डेश ग्वाले की तरह आचार्य कुंदकुंद बनने का स्वर्णिम अवसर भी आप प्राप्त कर सकते हैं । आप इन ग्रंथों को अपने घर में स्वाध्याय के लिए रख सकते हैं। महोत्सव के प्रथम चरण में 50 ग्रंथ प्रकाशित किए गए हैं, शेष समापन बेला में प्रकाशित करने की भावभूमि बनी है। अभी आप नीचे दिए गए बटन से आप रु.11,000/- जमा कराके ज्ञान दान कर सकते हैं, यह ग्रंथ आपको जैन विद्यापीठ, सागर (म.प्र.) द्वारा कुरियर के माध्यम से भेजे जायेंगे |
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