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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

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हथकरघा उद्योग। ---नौकर नहीं मालिक बनो यदि आपको अभी तक कोई अच्छी नौकरी नहीं मिली है अथवा आप अपनी नौकरी से निराश हैं और अपने स्वाभिमान को बनाये रखने के लिए कुछ ऐसा कार्य करना चाहते हैं जो आपके लिए और देश के लिए लाभकारी हो तो आप हथकरघा योजना से जुड़ सकते हैं।  यह योजना मध्य प्रदेश के बीना बारहा क्षेत्र में चल रही है।  इस योजना के अंतर्गत आपको 6 महीने की ट्रेनिंग द्वारा हथकरघा से कपडा निर्माण करना सिखाया जायेगा। इन 6 माह में आपको 9000 प्रति माह आय के रूप में दिया जायेगा। 6 माह बाद इस आय को आप अपना करघा लगाने के लिए उपयोग कर सकते हैं ।  आवास और भोजन की सुविधा भी वहीँ रहेगी। इस योजना से जुड़कर आप अपना कपडा निर्माण करके आगे चलकर प्रति माह 40000 से 50000 तक की आय कर सकते हैं।  देश में बढ़ती हुई बेरोजगारी, पूँजी के अभाव में व्यापार के घटते अवसरों को देखते हुए आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए एक योजना है । कुण्डलपुर में अक्षय तृतीया 9 मई का हथकरघा की नई शाखा का शुभारम्भ आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में होने जा रहा है जिसकी चयन प्रक्रिया के अंतर्गत दिनांक 4 मई 2016 को साक्षात्कार होना है।आप अथवा आपकी जानकारी में जो भी युवा इस योजना से जुड़ना चाहते हैं कृपया इस नंबर पर संपर्क करें: 

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गुरुदेव के सपनों की उड़ान हथकरघा उद्योग

सिर्फ हंगामा खड़ा करना हमारा उद्देश्य नही है,
गुरु की कोशिश रही है
कि INDIA भारत बनाने के लिये
घर घर में सिर्फ चरखा ही नही
हथकरघा भी होना चाहिये!!

विद्यागुरु के आशीष से फलीभूत होता हथकरघा उद्योग!
स्वावलंबी भारत बने,अद्वितीय हो ये देश!!

विद्यागुरु की अनुपम करुणा,हम सबको दिखती शीघ्र साकार!
भारत पुनः सोने की चिड़िया बनेगा,मन में है विस्वास!!

क्या है हथकरघा❓
हथकरघा वह अहिंसक उद्योग है जिसे उड़ान दी है जैनाचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी ऋषिराज ने,और उनके उस स्वपन को साकार करने के लिये अपना तन-मन सब कुछ समर्पित करने के लिये तैयार है आदरणीय गुरुदेव के अनन्य श्रद्धालु ब्रम्हचारी जी गण!!
और वे बहने जो पृथक से माताओं-बहनों को भी प्रशिक्षित कर रही है हथकरघा उद्योग के माध्यम से!!
इस युग के उन्नायक आचार्य गुरुदेव की अनन्त करुणा ही है जिसके फ़लस्वरूव वे हम सभी के भले के लिये निरन्तर चिंतित रहते है कि कैसे भारत पुनः अपनी समृद्धता की ओर गमन करें!!
हथकरघा उद्योग (जिसमें कपड़ा हाथ से बुना जाता है) भारत के प्राचीन और समृद्ध उद्योगों में से एक है, लेकिन पावरलूम के आने से इस उद्योग को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा जिसका सीधा असर बुनाई करके आमदनी कमाने वाले बुनकर परिवारों पर पड़ा!!उस समय इसका प्रभाव इतनी गहनता से दिखने में नही आया!!लेकिन जब गुरुदेव ने देखा कि आजकल के भारतीय युवाओं की सबसे बड़ी समस्या की वह पूर्ण शिक्षित होने के बाद आर्थिक समस्या से जूझ रहे है,इसी समस्या के उन्मूलन के पूज्य आचार्य भगवन्त ने हथकरघा से उद्योग की राह दिखाई,उनकी ही जीवन्त करुणा का प्रतिफल है आज वह हथकरघा उद्योग आसमान की बुलंदियों को प्राप्त कर रहा है!!

क्यों आवश्यक है हथकरघा की प्रेरणा❓
हथकरघा की प्रेरणा इसीलिये भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी नींव भी पूर्ण अहिंसा पर आधरित है,जहाँ आजकल न जाने अधिक कमाई के चक्कर में कितने मूक प्राणियों की हिंसा की जा रही है इसीलिये भी महत्वपूर्णता है हमारे गुरुदेव की प्रेरणा हथकरघा उद्योग की!!

??हमारे उद्देश्य एंव दायित्व??
भारत को इंडिया से बचाना अर्थात ऐसा सफलतम प्रयास जहाँ भारत का प्रत्येक व्यक्ति आत्मनिर्भर हो,वह स्वस्थ्य तन-मन-धन और वतन वाला हो जिससे वह मानसिक गुलामी से बच सके!!और दूसरों की नौकरी करने की अपेक्षा स्वयं दुसरो को रोजगार दे!!

?हम सभी के उद्देश्य की सफलता का कारण?
हम सभी आचार्य भगवन्त के अनन्य ऋणी रहेगे क्योकि हम समझते है कि इस भारत देश में आदरणीय महात्मा गांधी के बाद कोई पुनः भारत देश की संस्कृति से जुडी स्वदेशी परम्परा को जीवन्त किया है तो वे आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी ही है जिनके एक इशारे से सभी उनकी आज्ञा में तत्पर रहते है!!
और इसमें कोई आश्चर्य नही रहेगा कि भारत देश पुनः एक सोने की चिड़िया कहलायेगा!!⁠⁠⁠⁠

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