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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

मोबाईल का उपयोग सीमित हो !


संयम स्वर्ण महोत्सव

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चंद्रगिरि डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान दिगम्बर जैन आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा कि अपनी प्रषंसा करने से अपने गुण नष्ट हो जाते हैं। अपनी क्षमता का उपयोग करें मन को वष में करें । मोबाईल मंदिर में संत निवास में सब जगह बजते रहते हैं कोई ध्यान नहीं देता है इससे बहुत सी बीमारियाँ भी होती है इसका सीमित उपयोग करें। ग्रन्थों के दृष्टांत देकर आचार्य श्री ने कहा कि धन का उपयोग पुण्य कार्यों में करो वह तो नष्ट होगा ही यदि पुण्य कार्यों में उपयोग करेंगे तो और पुण्य बंध होगा। अपनी क्षमता का उपयोग धार्मिक कार्यों में करो तभी सार्थकता है। मुद्रा की कीमत घट रही है भले ही आप के पास पैसा बढ़ रहा हो। चक्रवर्ती के पास भी बहुत वैभव होता है लेकिन उनका भी पतन हो जाता है। सम्पदा का सही उपयोग करना ही महान कार्य है। जो कमाया है उसे यथयोग्य दान करो मोह को कम करते हुये। रावण ने अपनी शक्ति का सहीं उपयोग नहीं किया यदि करता तो वह महापुरूष बन जाता । कठिन साधना सही उद्देष्य के साथ करने से लक्ष्य की प्राप्ति होती है। पहले के लोग शुभ उद्देष्य को लेकर कार्य करते थे। आज क्वालिटी कम हो रही है कार्य सही नहीं हो रहे हैं।

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