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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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पीठ से मैत्री - आचार्य विद्यासागर जी द्वारा रचित हायकू ४३५


संयम स्वर्ण महोत्सव

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haiku (435).jpg

 

पीठ से मैत्री

"पेट ने की तब से"

जीभ दुखी है।

 

हायकू जापानी छंद की कविता है इसमें पहली पंक्ति में 5 अक्षर, दूसरी पंक्ति में 7 अक्षर, तीसरी पंक्ति में 5 अक्षर है। यह संक्षेप में सार गर्भित बहु अर्थ को प्रकट करने वाली है।

 

आओ करे हायकू स्वाध्याय

  • आप इस हायकू का अर्थ लिख सकते हैं
  • आप इसका अर्थ उदाहरण से भी समझा सकते हैं
  • आप इस हायकू का चित्र बना सकते हैं

लिखिए हमे आपके विचार

  • क्या इस हायकू में आपके अनुभव झलकते हैं
  • इसके माध्यम से हम अपना जीवन चरित्र कैसे उत्कर्ष बना सकते हैं ?
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6 Comments


Recommended Comments

जब व्रत में पेट पीठ से लग जाता है मतलब मैत्री हो जाती है तब यह जीभ भूख लगने  की बजह से दुखी रहती है।

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 आचार्य भगवन ससंघ

के पावन चरणों में कोटि कोटि नमन्। 

पेट ने .....क्या वहीँ से  वास्तविक दुख आता है ?

 

 

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4 hours ago, Pratibha said:

 

 

 आचार्य भगवन ससंघ

के पावन चरणों में कोटि कोटि नमन्। 

पेट ने .....क्या वहीँ से  वास्तविक दुख आता है ?

 

 

Jb se pet pith k sman level me aaya khane pina km krke tb se jib ko pura taste ni aa ra isliye jib dukhi h

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आचार्य भगवन और समस्त मुनिसंघ के चरणोमे नमोस्तु !!!

ज़ब भी कोई मुनिराज सल्लेखना व्रत को धारण करते है उस समय पेट और पीठ मानो एक ही है ! उस वक्त जीभ का कोई काम ही नहीं !!

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