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सार्थक बोलो - आचार्य विद्यासागर जी द्वारा रचित हायकू ३४८

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संयम स्वर्ण महोत्सव

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Haiku (348).jpg

 

 

सार्थक बोलो,

व्यर्थ नहीं साधना,

सो छोटी नहीं।

 

हायकू जापानी छंद की कविता है इसमें पहली पंक्ति में 5 अक्षर, दूसरी पंक्ति में 7 अक्षर, तीसरी पंक्ति में 5 अक्षर है। यह संक्षेप में सार गर्भित बहु अर्थ को प्रकट करने वाली है।

 

आओ करे हायकू स्वाध्याय

  • आप इस हायकू का अर्थ लिख सकते हैं
  • आप इसका अर्थ उदाहरण से भी समझा सकते हैं
  • आप इस हायकू का चित्र बना सकते हैं

लिखिए हमे आपके विचार

  • क्या इस हायकू में आपके अनुभव झलकते हैं
  • इसके माध्यम से हम अपना जीवन चरित्र कैसे उत्कर्ष बना सकते हैं ?
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प्रत्येक शब्द का अर्थ होता है प्रतिफल भी होगा निश्चित है। संसार मे प्रत्येक वस्तु लौट कर आती है। शब्द भी ।तो क्यो न बोलते हुए ध्यान रखा जाये जिसे प्रायोगिक भाषा मे विवेक कहा जाता है। 
संयमित भाषा का प्रयोग आप के ज्ञान को और आप की परवरिश को दर्शाता है। 
इसलिये जब भी बोले सार्थक शब्दो का प्रयोग करे। साधक के लिये परम आवश्यक है जितना जरुरी है उतना ही बोले।शब्दो का चयन और प्रयोग उत्तम साधना के फलीभूत होने का प्रमाण प्रस्तुत करती है। इसलिये साधक की साधना की सफलता शब्दो के चयन पर निर्भर करती है। सो बात को कह देना कोई छोटी बात नही है अर्थ क्या है पहले से विचार कर कहना ही साधना है। यह नियम साधक और गृहस्थ दोनो पर समान रूप से लागू होता है। सो विचार किजीये तभी शब्दो को कहिये।

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