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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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दृढ़ चरित्र - संस्मरण क्रमांक 22


संयम स्वर्ण महोत्सव

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   ☀☀ संस्मरण क्रमांक 22☀☀
           ? दृढ़ चरित्र ?
 आचार्य भगवन भविष्य में दृढ़ चारित्र का पालन करेंगे, चरित्र को अपने जीवन की अंतिम श्वासों तक बहुत अच्छे से अपनाएंगे, इसका पता पूज्य आचार्य श्री ज्ञानसागर जी को बहुत पहले चल चुका था
बात उस समय कि है जब आचार्य भगवन ब्रम्हचारी अवस्था मे थे, जब ब्रह्मचारी विद्याधर जी मुनि श्री ज्ञानसागर जी महाराज के सानिध्य में केशलोंच कर रहे थे, उस समय प्रत्येक बाल खींचतें समय खून निकल रहा था, उस दृश्य को देखकर वहां पर उपस्थित क्षुल्लक श्री आदिसागर जी ने मुनिवर ज्ञान सागर जी को इस स्थिति से अवगत करवाया तो उन्होंने कहा-"चुप रहो" फिर भी क्षुल्लक जी से देखा नहीं गया  अतः उन्होंने थोड़ी देर बाद पुनः ब्रहमचारी विद्याधर से कहा- "क्यों कैंची मंगवाएं" ब्रह्मचारी विद्याधर बोले "ओम ह्रूं।" तो मुनि श्री ज्ञानसागर जी ने कहा-" हाँ दृढ़ता है।" ब्रहमचारी विद्याधर जी की यही दृढ़ता उन्हें आचार्य विद्यासागर बना गई।
आज हम देख रहे हैं कि आचार्य विद्यासागर  जी *न चलन्ति चरित्रत: सदा नृसिंहा: अर्थात (जो मनुष्य चरित्र को कभी भी छोड़ते नहीं है, हमेशा सिंह की तरह निर्भय रहते है) 
आचार्य पूज्यपाद देव की इन पंक्तियों को अपनी दृढ़ता के माध्यम से चरितार्थ कर रहे हैं।

? आचार्य श्री विद्यासागर पत्राचार पाठ्यक्रम प्रणाम अंजिलि भाग 1 से साभार?

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