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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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अनुशासन - संस्मरण क्रमांक 19


संयम स्वर्ण महोत्सव

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    ☀☀ संस्मरण क्रमांक 19☀☀
           ? अनुशासन ?
मैंने सुना है एक दिन रात्रि के समय जब लोग आचार्य महाराज की सेवा में व्यस्त थे,तब किसी की ठोकर लगने से तेल की शीशी गिर गई।शीशी का ढक्कन खुला था, तो तेल भी फैल गया।
 सभी थोड़ा घबराये ,पर आचार्य महाराज मुस्कुराते रहे,सुबह आचार्य वंदना के बाद आचार्य महाराज चर्चा करते-करते बोले की देखो- शिष्य और शीशी दोनों में डांट लगाना कितना जरूरी है जैसे शीशी में डाट(ढक्कन )ना लगा हो तो उसमें रखी कीमती चीज गिर जाती है, ऐसे ही शिष्य को डांट (अनुशासन के लिए कठोरता)न लगाई जाए तो स्वच्छंद होने और मोक्ष मार्ग से विचलित होने या गिर जाने की संभावना बढ़ जाती है।
शीशी  गिनने की एक जरा सी घटना से इतना बड़ा संदेश दे देना यह आचार्य महाराज की विशेषता है।

 ? आत्मान्वेषी पुस्तक से साभार ?
? मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज
 

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