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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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मुक्ति - संस्मरण क्रमांक 16


संयम स्वर्ण महोत्सव

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  ☀☀ संस्मरण क्रमांक 16☀☀
           ? मुक्ति ?
मुक्तागिरी 1980 वर्षाकाल पूरा होने को था,दीपावली की पूर्व संध्या में आचार्य महाराज ध्यानस्थ हुए तो सारी रात निश्चल ध्यान में बैठे-बैठे ही बीत गई। महावीर स्वामी के परिनिर्वाण की प्रत्युष बेला में उन्होंने आंखें खोली और क्षणभर हम सभी की ओर देख कर कहा कि-  भगवान तो वर्षों पहले मुक्त हो गए हम भी ऐसे ही कभी मुक्त होंगे पर जाने कब होंगे
उस क्षण उनकी दिगंत में झांकती आंखें मुख्य मंडल पर छाई अपार शांति और गदगद कंठ से झरती यह अमृतवाणी देख- सुनकर हम सभी अवाक रह गए, एक क्षण को लगा मानो वे सचमुच संसार के आल-जाल से मुक्त होकर आत्म-आनंद में डूब गए हैं
मुक्ति पाने की इतनी गहरी प्यास उन्हें शीघ्र ही संसार के आवागमन से मुक्त करेगी।
 
मुक्तागिरी(1980)
? आत्मान्वेषी पुस्तक से साभार ?
? मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज

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