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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

कर्म कैसे करें स्वाध्याय एवं प्रतियोगिता पंजीकरण फ़ॉर्म


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कर्म कैसे करें : स्वाध्याय एवं प्रतियोगिता 
प्रतियोगिता पंजीकरण फ़ॉर्म भर जुड़ सकते हैं स्वाध्याय में हमारे साथ |

संसारी जीव अनादिकाल से कर्म संयुक्त दशा में रागी-देषी होकर अपने स्वभाव से च्युत होकर संसार-परिभ्रमण कर रहा है। इस परिभ्रमण का मुख्य  कारण अज्ञानतावश कर्म-आस्रव और कर्मबंध की प्रक्रिया है जिसे हम निरंतर करते रहते हैं। कर्म बंध की क्रिया अत्यन्त जटिल है और इसे पूर्ण रूप से जान पाना अत्यन्त कठिन है, लेकिन यदि हमें केवल इतना भी ज्ञान हो जाए कि किन कार्यों से हम अशुभ कर्मों का बंध कर रहे हैं तो सम्भव है हम अपने पुरुषार्थ को सही दिशा देकर शुभ कर्मों के बंध का प्रयास कर सकते हैं|

 

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मुनिश्री क्षमा सागर जी  ने 18 प्रवचनों से जन-साधारण को कर्म सिद्धान्त के जैनदर्शन में प्रतिपादित विषयों से अवगत कराने हेतु अत्यन्त सरल भाषा में उन परिणामों को स्पष्ट किया है जिनके कारण हम निरन्तर अशुभ कर्मों का बन्ध करते रहते हैं। 

 

लेके आए आपके लिए सामूहिक अनलाईन स्वाध्याय का विशेष प्रयोग 

*फ़ॉर्म लिंक* 
https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSf36rwc8d_x8KCKAtv3wyWgTdupDG25YFqCQ4RKKP8jiMo-og/viewform?usp=sf_link

*स्वाध्याय लिंक* 
https://vidyasagar.guru/blogs/blog/48-1

 

पंजीकरण सूची 

https://docs.google.com/spreadsheets/d/1aGzU6H8F7N9Plwm2K-ELi-65FVlIDnqsM3bZoe6c79Q/edit?usp=sharing

 

 

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