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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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बहुत मीठे - आचार्य विद्यासागर जी द्वारा रचित हायकू २१‍४


संयम स्वर्ण महोत्सव

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Haiku (214).jpg

 

 

बहुत मीठे,

बोल रहे हो अब !,

मात्रा सुधारो।

 

हायकू जापानी छंद की कविता है इसमें पहली पंक्ति में 5 अक्षर, दूसरी पंक्ति में 7 अक्षर, तीसरी पंक्ति में 5 अक्षर है। यह संक्षेप में सार गर्भित बहु अर्थ को प्रकट करने वाली है।

 

आओ करे हायकू स्वाध्याय

  • आप इस हायकू का अर्थ लिख सकते हैं
  • आप इसका अर्थ उदाहरण से भी समझा सकते हैं
  • आप इस हायकू का चित्र बना सकते हैं

लिखिए हमे आपके विचार

  • क्या इस हायकू में आपके अनुभव झलकते हैं
  • इसके माध्यम से हम अपना जीवन चरित्र कैसे उत्कर्ष बना सकते हैं ?

1 Comment


Recommended Comments

मीठा कब बोलते हैं जब स्वार्थ हो। सभी को प्राय मालूम होता है कि कटु शब्दों का प्रयोग करने से या रूक्ष भाषा के प्रयोग से किसी से कभी भी कोई काम नही लिया जा सकता। तो क्या स्वार्थ वश मीठा बोल कर काम लेना सही है ? मान लिजिये किसी गुरु ने अपने पास शिष्य को रोक कर रखने के लिये सदा मीठे और स्वार्थ पूर्ण वचनो का ही प्रयोग किया तो क्या कभी शिष्य की कमियाँ दूर हो पायेंगी?  कभी नही अथार्थ बिना कटु वचन और कठोर दंड के गलती मे सुधार करना मुश्किल है। सो क्यो ना मात्रा में सुधार कर दिया जाये और जीवन मे निस्वार्थ भावना का संचरण किया जाये।जब स्वार्थ से निस्वार्थ की और कदम बढ़ाते है तो जीवन में सकारत्मक परिवर्तन आने लगता है। दूसरो को बात समझाने के लिए छल का सहारा लेने की जरुरत नही पड़ती।

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