Jump to content
मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • entries
    108
  • comments
    2
  • views
    15,048

Contributors to this blog

विनम्र श्रद्धा - संस्मरण क्रमांक 15


    ☀☀ संस्मरण क्रमांक 15☀☀
           ? विनम्र श्रद्धा ?
  एक बार की बात है सिवनी के बड़े मंदिर में पूज्य आचार्य भगवान विराजमान थे,वयोवृध्द पंडित सुमेर चंद जी दिवाकर उनके दर्शन करने आए,तत्व चर्चा चलती रही,
जाते समय पंडित जी बोले कि-  महाराज हमें तो आचार्य शांति सागर जी महाराज ने एक बार मंत्र जपने के लिए माला दी थी, जो अभी तक हमारे पास है।  पंडित जी का आशय था कि-आप भी हमें कुछ दें,पर आचार्य भगवन तत्काल बोले कि - पंडित जी हमें तो हमारे आचार्य महाराज *(ज्ञानसागर जी)मालामाल कर गए हैं।
माला की लय में मालामाल सुनकर सभी हंसने लगे।
 इस स्वस्थ मनोविनोद में अपने पूर्व आचार्यों के प्रति विनम्र श्रद्धा, उनसे प्राप्त मोक्षमार्ग के प्रति
गौरव और अपनी लघुता यह सभी बातें छुपी थी, साथ ही एक संदेश भी पंडित जी के लिए या शायद सभी के लिए था कि चाहो तो महाव्रती होकर स्वयं भी मालामाल हो जाओ, अकेली माला कब तक जपते रहोगे।

शिक्षा- पूज्य आचार्य भगवंत अपने गुरु और पूर्वाचार्यों के प्रति अनन्य आस्था, श्रध्दा, और समर्पण से भरे हुए है, उनके उपकारों के प्रति कृतज्ञ है, और सभी को मोक्षमार्ग में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहते है, हमे भी  अपने पूर्वाचार्यों और आचार्य भगवन के उपकारों को कभी भी नही भूलना चाहिए, और धर्म के मार्ग पर चलते हुए, मोक्षमार्ग में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए

(सिवनी,1991)
? आत्मान्वेषी पुस्तक से साभार
? मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज
 

0 Comments


Recommended Comments

There are no comments to display.

Guest
Add a comment...

×   Pasted as rich text.   Paste as plain text instead

  Only 75 emoji are allowed.

×   Your link has been automatically embedded.   Display as a link instead

×   Your previous content has been restored.   Clear editor

×   You cannot paste images directly. Upload or insert images from URL.

  • बने सदस्य वेबसाइट के

    इस वेबसाइट के निशुल्क सदस्य आप गूगल, फेसबुक से लॉग इन कर बन सकते हैं 

    आचार्य श्री विद्यासागर मोबाइल एप्प डाउनलोड करें |

    डाउनलोड करने ले लिए यह लिंक खोले https://vidyasagar.guru/app/ 

×
×
  • Create New...