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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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दृष्टि पल्टा दो - आचार्य विद्यासागर जी द्वारा रचित हायकू ​​​​​​​१‍९३


Haiku (193).jpg

 

 

दृष्टि पल्टा दो,

तामस समता हो,

और कुछ ना…

 

हायकू जापानी छंद की कविता है इसमें पहली पंक्ति में 5 अक्षर, दूसरी पंक्ति में 7 अक्षर, तीसरी पंक्ति में 5 अक्षर है। यह संक्षेप में सार गर्भित बहु अर्थ को प्रकट करने वाली है।

 

आओ करे हायकू स्वाध्याय

  • आप इस हायकू का अर्थ लिख सकते हैं
  • आप इसका अर्थ उदाहरण से भी समझा सकते हैं
  • आप इस हायकू का चित्र बना सकते हैं

लिखिए हमे आपके विचार

  • क्या इस हायकू में आपके अनुभव झलकते हैं
  • इसके माध्यम से हम अपना जीवन चरित्र कैसे उत्कर्ष बना सकते हैं ?

1 Comment


Recommended Comments

कहते हैं दृष्टि के बदलने से सृष्टि बदल जाती है उसी तरह तामस कोबदलने से समता बन जाती है आचार्य भी कहते हैं कि जब मोह रूपी अंधकार के नष्ट होने पर राग द्वेष नष्ट हो जाता है और राग द्वेष के नष्ट होने पर समता आ जाती है और समता आ जाने पर ध्यान करने से कर्म शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं और फिर कुछ नही बचता तुरन्त मोक्ष हो जाता है

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