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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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कोल्ड स्टोरेज जीवन रक्षक नहीं वह तो जीवन भक्षक – आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज


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महावीर जयंती पर विशेष दिव्या देशना  

 

वर्षों से महावीर जयंती मनाते आये हैं , चैत्र मास आते ही एक एक दिन गिनते हैं | कब आये कब आये  सोचते हैं पर खेद का विषय हैं पिछले 2 वर्ष से इस उत्साह उमंग और भक्ति में कमी सी आ गई | आज लग ही नहीं रहा की महावीर जयंती हैं | गत साल तो फिर भी थोड़ा कम था , इस वर्ष तो और ज्यादा नाजुक स्थिथि हैं |

 

 

ऐसे सामुहिक अंतराय कर्म का उदय आया जो ऐसी स्थिति बन गई | वैश्विक महामारी ने भयावय रूप ले लिया | महराष्ट्र में तीन लाख से भी ज्यादा लोग पीड़ित हैं | सरकार भी क्या करें – आपको ही जो करना हैं व करें | इस रोग हेतु सबसे अधिक आवश्यकता हैं – प्राण वायु की | प्राणों का संरक्षण बिना प्राण वायु के नहीं हो सकेगा | प्राण रहेंगे तो शरीर रहेगा, शरीर रहेगा तो धर्म रहेगा | शरीर को रखने हेतु अन्न की आवश्यकता हैं |

 

स्वामी समंतभद्र आचार्य ने कहा की “यद् निष्ट तद  व्रतये“   धर्म को जीवन में रखना हैं तो पहले जो अनिष्ठ हैं उसका त्याग करों | जो जीवन के लिए घातक हैं उसका तो त्याग ही कर देना चाहिए, तभी धर्म सुरक्षित रहेगा | आज मैं पूछना चाहता हूँ  की आप सब जाग्रत हैं या नहीं ?  कोल्ड स्टोरेज में फल फूल रखते हैं, कब से रखा हैं – पता नहीं |

 

अन्य वस्तुओं की तो शास्त्र में मर्यादा एक हफ्ते आदि बताई फिर इन साग सब्जी फल की मर्यादा ? चाहें नगर हो या ग्राम – घर में हो या बाहर, बासी हो गया तो नहीं खायेंगे, बच्चों को भी नहीं देंगे, रोगी बन जायेंगे | आज इसी से करोड़ो का व्यपार चल रहा हैं, अकाल में ही फल आदि आपको लाके दिए जा रहे हैं, आप भक्ष मान के खा रहे हैं, कैसे पढ़ें लिखें हैं आप ?

 

अपने आप को समझदार मान रहे हो – standard मान रहे हैं – जो बेमौस फल सब्जी खायेगा, निश्चित बेमौसम चला जायेगा | डॉक्टर लोग भी इसे नहीं समझ पा रहे हैं – कैसे पढ़े लिखें कहलायेंगे ?  कैंसर की पूरी सम्भावना हैं, प्राण घातक हैं | ऐसे स्थान पर रख कर क्या धर्म सुरक्षित रख पा रहे हैं ? खेद के साथ कहना पड़ता हैं यह सब विदेशी शिक्षा का ही प्रति फल हैं |  रखने की तो छोड़ो, छूने योग्य भी नही हैं | जो आटा आ रहा हैं, कब का हैं , पता ही नहीं |

 

ऐसे कोल्ड स्टोर में रखे पदार्थों को गैया तो क्या गधे भी उसे नहीं खाते | आपकी कौनसी गति विधि हैं कोई ज्ञान नहीं | एक और फ़ास्ट फ़ूड की तरह सी फ़ूड भी होता हैं – सी फ़ूड और कुछ नहीं समुद्र के जीव जंतुओं को भोजन बना के खा रहे हैं – आचार्यों ने ऐसे व्यक्तियों के साथ रहने को भी मना किया हैं |

 

आप इस विषय में सोच भी नहीं रहे हो | जो कुछ भी कोल्ड स्टोरेज में रखते हैं , वह खाना तो दूर  छूने योग्य भी नहीं | दूसरा भाजी वाला इत्यादि में रंग छिड़ककर उन्हें ताज़ी ताज़ी बताते हैं – आपका तो भोजन ही नहीं होता हरी सब्जी के बिना | आज उन्हीं से गंभीर बीमारियाँ किडनी आदि फैल हो रहे हैं  |

 

शुद्ध सात्विक भोजन करोंगे तब  ही धर्म को जीवित रख पाओंगे | कहते हुए मुझे बुरा नहीं लग रहा – शुद्ध भोजन में क्या क्या घुस गया | सोच लो प्राणों की रक्षा हेतु साग सब्जी कुछ नहीं, अन्न चाहिये | अन्न से ही प्राण बच सकते हैं | अन्न को बीज भी कहते हैं | 6 महीने तक सूर्य के ताप को सहन करता हैं, तपस्या के बिना बलिष्ट खाने योग्य नही बन सकता | खून का बनना अलग बात, बन कर उसका टिके रहना अलग बात | इसलिए क्या खा रहे हैं | थर्मामीटर से तापमान नापते हैं, तापमान अर्थात भीतर की गर्मी, साग सब्जी से वह गर्मी नहीं आती, अन्न से ही वह गर्मी आएगी|  जठराग्नि प्रदीप्त होगी तभी पाचन शक्ति अच्छी होगी | तापमान गिरते जा रहा हैं अब तो हिमपात भी होने लगा | रक्त संचार भी तभी जठराग्नि उदीप्त हैं, उद्दीपन हेतु बीज चाहिये| शरीर को बीज / अन्न का कीड़ा कहा, फल या साग सब्जी का नहीं | अन्न खाओ, दो रोटी किसान खाता हैं तो सुबह से  शाम तक काम करता रहता हैं | गर्मी के दिन में थोड़ा सा सतवा घोल कर पी लिया – अब कहीं भी जाओ, लू भी कुछ नहीं कर सकती |  आज पानी तक दूषित हो गया, वनस्पति पर कीट नाशक छिड़कते हैं , वह तो प्राण घातक ही हैं |

 

अंगूर (दाक्ष) आदि को कीड़े से बचाने के लिए पानी में डुबोते हैं उसमे दवा भी रहती हैं जो अंगूर के भीतर तक चले जाती हैं | पैसा भी गया, प्राण भी गए सब गया | रोग और भयानक हो गया | अब तो सोचो कोल्ड स्टोरेज के पदार्थ जीवन रक्षक नहीं वे तो जीवन भक्षक हैं | जब तक परिक्षण, नीरक्षण अथवा निर्णित नहीं  तब तक कैसे कुछ भी खा सकते हैं |

 

अब सब कहने लगे फ़ास्ट फ़ूड मत खाओ, सी फ़ूड बंद करो | क्यों हुआ परिणाम सामने हैं पर कोल्ड स्टोरेज के पदार्थों से कोई नहीं डर रहा बल्कि निर्भीक होके प्रयोग कर रहे हैं – ऐसे में सम्यक दर्शन आएगा ही नहीं | आप कैसे माता पिता, कैसे संरक्षक हैं ? इसे घर से बहार निक़ालना ही पड़ेगा | हमे तो बहुत विस्मय होता हैं – कल संघ के मध्य भी रखा था | सभी महाराज जी ने कहा इसे हाथ भी न लगाये | यह सब चीजें घर में आनी नहीं चाहिये | आपकी क्वालिफिकेशन का क्या – हम ऐसा आशीर्वाद कभी नहीं देंगे |

 

धर्म के झंडे को ऊँचा रखना हैं तो इन सब का त्याग करना होगा |  आपके बाप दादाओं ने जो इतनी मेहनत से तैयार किया उस धर्म को सुरक्षित रखना हैं | कुछ कटु शब्द का प्रयोग किया किन्तु आवश्यक था | ग्रंथो में आया हैं बिना कुछ कहे, बिना कुछ पूछे भी हमे बोलना चाहिए | इतना ही पार्यप्त हैं |  अहिंसा परमो धर्म की जय |

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