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आचार्य विद्यासागर ने दिखाया अहिंसा मार्ग, जेलों में लगाई मशीनें, कैदी हथकरघा से बना रहे वस्त्र, परिवार के खाते में जाता है मेहनत का पैसा

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Vidyasagar.Guru

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तिहाड़ सहित देशभर की 6 जेलों में चलाया अभियान, हिंसा कर कैदी बने लोगों की बदल रही सोच

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खातेगांव ।

महात्मा गांधी के बाद जैनाचार्य विद्यासागरजी ने चरखे और हथकरघा से स्वावलंबन और रोजगार के साथ ही अहिंसा की राह भी प्रशस्त की है। उनके मार्गदर्शन पर देशभर की जेलों में सम्यकदर्शन सहकार संघ ने हथकरघा अभियान चलाया है। जेलों में मशीनें उपलब्ध करवाई गई हैं। यहां कैदी काम करते हैं और जो उनकी मेहनत का पैसा बनता है, वह उनके परिवार के खाते में डाला जाता है। कैदियों को जीवनभर के लिए शाकाहार से भी जोड़ा जा रहा है।
आचार्यश्री नेमावर में चातुर्मास कर रहे हैं। उनकी प्रेरणा से जैन समाज ने बीना बारह, कुंडलपुर, अशोकनगर, जगदलपुर, डिंडोरी, मुंगावली, गुना, राहतगढ़, प्रतिभास्थली जबलपुर, अमरकंटक, डोंगरगढ़, ललितपुर, खजुराहो, टीकमगढ़ आदि जगह पर चल-चरखा और श्रमदान हथकरघा केंद्र खोलकर लगभग 2 हजार मशीनें स्थापित की हैं। जेल विभाग के अधिकारियों और सजा काट चुके एक व्यक्ति ने आचार्यश्री को बताया था कि यह विभाग और कैदी की तरफ सरकार का ध्यान नहीं होता है। इस पर 2017 में सक्रिय सम्यकदर्शन सहकार संघ ने सागर जेल में रिटायर्ड डीएसपी ब्रह्मचारिणी रेखा जैन के मार्गदर्शन में 60 से ज्यादा मशीनें लगाई और कैदियों को प्रशिक्षण दिया। संघ के अध्यक्ष ब्र.सुनील भैयाजी ने बताया कि इन मशीनों और सेटअप पर संघ ने लगभग सवा करोड़ रुपए खर्च किए। एक मशीन की लागत 50 से 75 हजार तक आती है। इसके बाद जबलपुर, मिर्जापुर, बनारस, आगरा, तिहाड़ जेल (क्रमांक-1) में भी इसे शुरू किया गया। बहुत जल्द ही विभिन्न प्रदेशों की कई अन्य जेलों में भी इसकी शुरुआत होने वाली है।

 

एक दिन में एक व्यक्ति 400 से 800 रु. तक कमाता है।
मिर्जापुर जेल में दरी, आगरा में धोती-दुप्पटे, बनारस जेल में साड़ी बनाई जाती है। एक व्यक्ति एक दिन में 400 से 800 रुपए तक कमा लेता है। यहां काम करने वाले कैदियों के परिवार के साथ जाइंट एकाउंट खोला जाता है। कैदी के काम करने पर पैसे खाते में डाल दिए जाते हैं, जिससे परिवार का पालन-पोषण होता रहता है।

 
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