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आचार्य श्री ने आज पूज्य मुनिश्री योगसागर जीको " निर्यापक मुनि " घोषित किया

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Vidyasagar.Guru

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  आज बीनाबाराह में अभी अभी आचार्य भगवन ने 💫पूज्य मुनिश्री योगसागर जी💫को "संघ निर्यापक" घोषित कर दिया हैं...!! सम्भवता अब ये पक्का हो गया कि धीरे धीरे करके संघ में औऱ भी श्रेष्ठ मुनियों को संघ निर्यापक बनाने की प्रक्रिया बनी रहेंगी..!!

 

आचार्य श्री जी ने पूर्व मे समय सागर जी महाराज जी को संघ के निर्यापक घोषित किया था आज पुनः  आचार्य श्री जी ने योग सागर जी महाराज जी को संघ के निर्यापक घोषित किया है

 

 

 

*बीना बारहा से एक और विशेष समाचार-*
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*पूज्य मुनिश्री योगसागर जी महाराज भी निर्यापक मुनि घोषित।*
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_विगत कई दिनों से  देश भर में कयास लगाये जा रहे थे कि बीना बारहा में कुछ बड़ा होने बाला है। एक चर्चा थी कि तप कल्याणक के दिन दीक्षाएं होना सम्भावित है दूसरी ओर संभावनाएं चल रही थी कि संघ बड़ा होने के कारण व्यवस्थापन की दृष्टि से पूज्य गुरुदेव अब  कुछ और निर्यापक मुनि की घोषणा कर सकते हैं।_

_बीना बारहा जी मे आज दोपहर *पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के द्वारा पूज्य मुनिश्री योगसागर जी महाराज को निर्यापक मुनिराज बनाये जाने संबंधी घोषणा कर दी गई।* इसके पूर्व ललितपुर में पूज्य मुनिश्री समयसागर जी महाराज को भी निर्यापक मुनि बनाया गया था। चर्चा है कि आगामी समय मे भी धीरे धीरे ऐसी ही कुछ और व्यवस्थाएं बन सकती हैं। दीक्षाओ की संभावनाएं अभी समाप्त नही हुई हैं आगामी समय मे हो सकती हैं ऐसी चर्चाएं अभी भी चल रही हैं। ऐसे परम उपकारी आचार्य भगवन एवम उनके सभी सुयोग्य शिष्यों के चरणों मे नमोस्तु, नमोस्तु, नमोस्तु।_
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7 Comments


Recommended Comments

आचार्य श्री के चरणों में विनय पूर्वक सादर नमोस्तु नमोस्तु नमो नमः कोटि कोटि प्रणाम।🙏🙏🙏

समस्त संघ को मेरा सविनय नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तुते।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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गुरुवर का निर्णय अनोखा होता है क्योंकि उन्हें भविष्य का ज्ञान भी पूरी तरह है

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3 hours ago, Guest said:

niryapak ka meaning kya h koi bata sakta h kya and namostu aacharya bhagwant ke charno me

आचार्य श्री के प्रवचनांश  

 

- परम्परा को निर्मल व अक्षुण्ण बनाये रखने हेतु प्रवचन सार में आचार्य कुंद कुंद देव ने निर्यापक शब्द की स्पष्ट व्याख्या की है|  

- जब संघ में अनुभवी साधुओं का समूह तैयार हो जाता है तब संघ में नवदीक्षित मुनिराजों के निर्वाह के लिए निर्यापक श्रमण की व्यवस्था होती है जिससे संघ में श्रमणों का निर्वाह होता है और सम्पूर्ण संघ को इसका लाभ प्राप्त होता है| 

- मूलाचार में संघ में दीक्षित अर्यिकाओं के निर्वाह के लिए (शिक्षा, दीक्षा, प्रायश्चित इत्यादि) जो उनका गणधर होगा उसके व्यक्तित्व योग्यता गुण की अलग व्याख्या की गई है| 

-आवश्यकता अनुसार निर्यापकों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है|

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