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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

झूठा सच - False truth


Vidyasagar.Guru

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झूठा सच
 बचपन के 
 जाने कितने सच
 बड़े होने पर
 झूठे मालूम पड़ते हाँ!
 क्या सचमुच
 बड़े होते-होते हम
 सच को
 झूठ करते जाते हैं?

 

False truth
So many truths
Of our childhood
Seem false when we
Grow up.
Do we really
Turn all truths
Into falsehood
As we grow tall?

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1 Comment


Recommended Comments

गुरुवर की कलम ने क्या लिख दिया...आज उनके समाधिस्थ होने पर हर शब्द जैसे खुद बयान कर रहे हो......

मुझे मौत मेँ जीवन के फूल चुनना है।
अभी मुरझाना टूटकर गिरना और अभी खिल जाना है।
कल यहाँ आया था, कौन कितना रहा इससे क्या ?
मुझे आज अभी लौट जाना है।
मेरे जाने के बाद लोग आएँ, अर्थी संभाले, कांधे बदलें, इससे पहले मुझे खुद संभल जाना है।
मौत आए और जाने कब आए, अभी तो मुझे संभल-संभलकर रोज रोज जीना ओर रोज रोज मरना है|

मुनि भगवान क्षमा सागर जी महाराज
(समाधि दिवस 13मार्च)

प्रेषक - संयम जैन, बोराव

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