Jump to content
  • entries
    131
  • comments
    109
  • views
    21,669

Contributors to this blog

आचार्यश्री की नगर में अद्भुत अकल्पनीय ऐतिहासिक अगवानी

Vidyasagar.Guru

1,052 views

  • धन्य हो गई आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ससंघ के आगमन से लालित्य नगरी
  • आचार्यश्री के पदविहार में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, ऐतिहासिक रूप में हुआ नगर प्रवेश
  • पगडण्डी कहाँ चली गयी जो पहले थी : आचार्य श्री विद्यासागर जी
  • बुंदेलखंडी 'हओ' पर श्रद्धालुओं को खूब गुदगुदाया आचार्यश्री ने
  • कई किलोमीटर की लंबाई थी अगुवानी के जनसैलाव की

 

ललितपुर। जिस घड़ी का इंतजार ललितपुर वासियों को तीन दशक से अधिक समय से था वह इंतजार 21 नवम्बर को पूरा हो गया जब साधना के सुमेरु   भारतीय संस्कृति के संवाहक संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज अपने विशाल संघ के साथ ललितपुर नगर में प्रवेश किया। 


आचार्यश्री का पदविहार वांसी से ललितपुर की ओर प्रातःकाल 6 बजे शुरू हुआ।जैसे ही लोंगो ने आचार्य श्रेष्ठ के नगर आगमन की सुनी तो खुशियों का ठिकाना नहीं रहा।कोई पैदल तो कोई गाडी से पदविहार में सम्मिलित होने के लिए पहुंचा। इतनी सुबह सुबह भारी जनसैलाव उमड़ा देख रास्ते में पड़ने वाले गांवों के लोग भी उमड़ पड़े और आचार्यश्री की एक झलक पाने को लालायित देखे गए। जन सैलाव इतना था कि पुलिस प्रशासन लोगों से दूर से ही दर्शन करने की अपील कर रहे थे। बांसी से (ललितपुर से दूरी 20 किलोमीटर) ही हजारों की संख्या में बिना जूते-चप्पल  के श्रद्धालु चल रहे थे। जैसे-जैसे आचार्यश्री के पग आगे बढ़ रहे थे श्रद्धालुओं का जन सैलाव बढ़ता ही जा रहा था। हाइवे पर दूर-दूर तक अपार भीड़ ही भीड़ दिख रही थी। आलम यह था कि रोड की दूसरी ओर चलने वाले वाहनों को भी रुक-रुक चलना पड़ रहा था। इस दौरान आगे-पीछे और बीच में बड़ी संख्या में पुलिस प्रशासन व्यवस्था को सुचारू करने में लगे थे। आचार्यश्री के आगे आगे बैंड बाजे चल रहे थे इसके बाद पचरंगा झंडे लेकर कार्यकर्ता चल रहे थे इसके बाद पुलिस के पदाधिकारी चल रहे थे जो आचार्यश्री के दर्शन  लोगों से दूर से करने की अपील कर रहे थे ताकि पद विहार में बाधा उत्पन्न न हो। इसके बाद आचार्यश्री संघ सहित चल रहे थे पश्चात उनसे कुछ दूरी पर जन सैलाब चल रहा था।


 नगर में पूर्व से विराजमान मुनि श्री अविचल सागर जी ने नदनवारा पहुँचकर आचार्यश्री के चरणों में नमोस्तु पूर्वक नमन किया। रास्ते में रंग-बिरंगे गुब्बारे आकाश में छोड़े जा रहे थे। आचार्यश्री पदविहार करते हुए महर्रा ग्राम स्थित आदिनाथ कालेज प्रांगण में पहुंचे जहाँ पर मुख्य द्वार पर कालेज प्रबन्धन ने आचार्यश्री का वंदन किया। इसके पूर्व जैन पंचायत समिति और पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने आचार्यश्री के चरणों में श्रीफ़ल समर्पित कर आरती की।
आदिनाथ कॉलेज में सबसे पहले आचार्यश्री की पूजन भक्ति भाव से की गई।

news.jpgइस अवसर पर उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमारी एक चीज गुम गयी है। मैं आ रहा था, आप लोग भी आ रहे थे। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या वह चीज आप लोगों को मिल गयी? इस पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा 'हओ'। इस पर चुटकी लेते हुए आचार्यश्री ने कहा कि ललितपुर में भी 'हव' चलता कि नहीं। इस पर जन समुदाय ने कहा 'हओ'। उन्होंने कहा कि जो मतलब आप लोग समझ रहे हैं वह नहीं है।
उन्होंने आगे  कहा कि मैं सोच रहा था कि भूल गए हैं आप लोग। उन्होंने कहा कि अब पगडण्डी जीवित है कि नहीं। अब शायद पगडण्डी जीवित नहीं रह पाएगी क्योंकि पगडंडियों पर चलाना तो चाहते हैं लेकिन चलना नहीं चाहते। अंत में उन्होंने कहा कि वाहनों पर लिखा रहता है 'फिरमिलेंगे'। संचालन संघस्थ ब्र. सुनील भैया जी ने किया। एसडीएम सदर घनश्याम वर्मा ने महर्रा पहुँचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को समुचित दिशा निर्देश दिए।


आचार्यश्री की आहारचर्या महर्रा स्थित आदिनाथ कॉलेज परिसर में हुई। सामायिक के बाद महर्रा से ललितपुर नगर की ओर विहार हुआ जिसमें पूरा नगर उमड़ पड़ा। आज ललितपुर के इतिहास में एक नया इतिहास जुड़ गया। लोग कह रहे थे उन्होंने आज तक किसी संत के नगर आगमन पर इतना जनसैलाव उमड़ते नहीं देखा है।  प्रवेश के दौरान पूरे  रास्ते में पड़ने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठानों के मालिकों द्वारा अपने द्वार पर स्वयं सजावट और स्वागत  की गई थी। आचार्यश्री के नगर में प्रवेश करते ही ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शहर थम गया हो, एकमात्र आचार्यश्री के दर्शनों को लाखों आँखे निहार रही थी। सभी समुदाय के लोग आचार्यश्री को नमन कर रहे थे और स्वागत वंदन के लिए खड़े हुए थे। नगर प्रवेश का दृश्य अपने आप में देखने योग्य था।
पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह , अपर पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में सुरक्षा व्यवस्था में लगे हुए पुलिस अधिकारी और सिपाही बड़े ही आनंद के साथ आचार्यश्री के आगे और पीछे दौड़ते भागते चल रहे थे। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के समुचित प्रबंध किए गए थे। पंचायत समिति ने नगर की सीमा चंदेरा पर भव्य अगुवानी की। इसके बाद विशाल जनसैलाब गल्लामंडी, इलाइट चौराहा, जेल चौराहा, तुवन चौराहा होते हुए विशाल शोभायात्रा स्टेशन रोड स्थित क्षेत्रपाल मंदिरजी पहुँची। रास्ते में लोगों ने श्रद्धालुओं को जल, मिठाई, फल देकर उनका खूब स्वागत किया। रास्ते में जहॉ नवयुवक करतब दिखाते हुए चल रहे थे वहीं अनेक बग्गियां, घोड़े पर ध्वज लेकर चल रहे थे। विभिन्न स्वयंसेवी संगठन अपनी सेवाएं दे रहे थे। जिसने भी आज का यह नजारा देखा कह उठा अद्भुत, अकल्पनीय, ऐतिहासिक, भूतो न भविष्यति। नगर में जब जुलूस चल रहा था तो जिसको जहॉ जगह मिली वहॉ से इन अमूल्य पलों को देखने को आतुर थे। ऐसी कोई छत नहीं थी जिस पर बड़ी संख्या में नगरवासी न हो। कई लोग जब जगह नहीं मिली तो अन्य साधनों पर चढ़कर देख रहे थे। अनेक लोग तो वृक्षों पर चढ़कर इन पलों के साक्षी बन रहे थे। सचमुच अद्भुत नजारा। शब्द ही नहीं है आज के इस भव्यता से पूर्ण मंगल प्रवेश के वर्णन के लिए।


क्षेत्रपाल मंदिर पहुँचने पर  आचार्यश्री की भव्य अगुवानी की गई । इस दौरान तैयार विशेष मंच से जब आचार्यश्री संघ सहित चल रहे थे वह दृश्य अपने आपमें देखने योग्य, ऐतिहासिक और दर्शनीय था। चारों ओर से इस दौरान आवाज आचार्यश्री नमोस्तु की आवाज गुंजायमान हो रही थी। यह पल सभी अपने मोबाइल में भी कैद कर रहे थे। बैरिकेट लगे होने के बाद भी उसके अंदर पुलिस प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के कार्यकर्ताओं को हाथ से हाथ पकड़कर सुरक्षा जंजीर बनानी पड़ी। मैं भी इस व्यवस्था में शामिल होकर इन अद्भुत नजरों को करीब से देखकर पुलकित हो रहा था। आज नगर वासियों की भक्ति देख सचमुच लग रहा था कि नगर में चलते-फिरते भगवान आये हैं। अनेक हमारे जैनेतर भाई कह भी रहे थे ये तो धरती के देवता हैं। इनका दर्शन आखिर कौन नहीं करना चाहेगा।
नगर में उत्सव जैसा माहौल था। पाठशाला के बच्चे आचार्यश्री के अभियान हथकरघा, इंडिया नहीं भारत बोलो आदि की तख्तियां लेकर चल रहे थे। कई किलो मीटर की लंबाई में अगुवानी जुलूस देखने योग्य था।


आचार्यश्री के नगर आगमन पर स्वागत के लिये पूरा शहर सजाया गया था। सड़क के ऊपर किनारों में झिलमिल चमकनी तो नीचे  रंगोली बनाई गई थी। अनेक स्वागत द्वार बनाये गए थे। शहर के लोग धरती के देवता को अपने बीच पाकर धन्य हो रहे थे। जयकारों से आकाश गुंजायमान हो रहा था। विभिन्न परिधानों में महिलाएं स्वागत के लिए खड़ी थी।उल्लेखनीय है कि जहां बतौर राज्य अतिथि उनका प्रथम नगर बार नगर आगमन हो रहा था तो वहीं वह 31 वर्ष बाद नगर में आ रहे थे। उधर जैन शिक्षक सामाजिक समूह के सदस्यों ने आचार्यश्री के नगर आगमन की ख़ुशी में जिला अस्पताल में फल वितरण किया। नगर सजाने में वीर क्लब का योगदान रहा। 
इस अवसर पर राज्यसभा सासंद चंद्रपाल यादव, विधायक रामरतन कुशवाहा, सपा जिलाध्यक्ष ज्योति कल्पनीत, नगर पालिका अध्यक्षा रजनी साहू आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। नगर पालिका के पार्षदगण उपस्थित रहे।
गोलाकोट, खनियाधाना से बड़ी संख्या में लोग बसों से आये हुए थे साथ ही में गुरुकुल के बच्चे गुरुवर गोलाकोट चलो की तख्तियां लेकर चल रहे थे।
इस दौरान ललितपुर के साथ ही बार, बांसी,  कैलगुवा, गदयाना, महरौनी, मड़ावरा, पाली, तालबेहट, बबीना,जखौरा, बिरधा, टीकमगढ़, सागर, शिवपुरी, झाँसी, ग्वालियर,बीना, खिमलासा,  दिल्ली, दमोह, ग्वालियर, छतरपुर, बरुआसागर आदि अनेक स्थानों के बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे। नगर के सभी पत्रकार बंधु भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
जैन पंचायत समिति , पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव समिति, नगर की सभी स्वयंसेवी संस्थाओं, उप समितियों का योगदान उल्लेखनीय रहा। 
आचार्यश्री के देश-विदेश में लाखों की संख्या में भक्तों को देखते हुए इस भव्य मंगल प्रवेश का जिनवाणी चैनल पर लाइव प्रसारण भी किया गया, जिसे देश -विदेश में देखा देखा गया। 
उल्लेखनीय है कि आचार्यश्री के सान्निध्य में मसौरा स्थित दयोदय गौशाला परिसर में श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव 24 नवम्बर से 30 नवंबर तक बड़े ही उत्साह से होने जा रहा है।


अनियत विहारी का विहार :
आचार्य विद्यासागर जी महाराज कभी किसी को बता के विहार नहीं करते इसलिए उनके आगे अनियत विहारी संत लिखा जाता है। ललितपुर नगर प्रवेश को लेकर यह देखने भी मिला है। नगरवासी 22 नवम्बर को उनके नगर प्रवेश की पूर्ण संभावना मानकर चल रहे थे। 22 नवम्बर के हिसाब से ही लोग तैयारी में जुटे थे। बाहर से आने वाले इष्ट मित्र, रिश्तेदारों को भी यही सूचना दी गयी थी। लेकिन अचानक ही 21 तारीख को आचार्यश्री का मङ्गल पदार्पण नगर में हो गया। आज जब इतना जनसैलाव उमड़ पड़ा था यदि निर्धारित तिथि 22 नबम्बर को प्रवेश होता तो न जाने कितना जनसैलाव उमड़ता।
जिलाधिकारी, एसपी पहुँचे आशीर्वाद लेने :
शाम को क्षेत्रपाल मंदिर पहुंच कर जिलाधिकारी श्री मानवेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री ओपी सिंह,  अपर पुलिस अधीक्षक श्री अवधेश विजेता ने आचार्य श्री विद्या सागर जी मुनिराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और नगर आगमन पर उनको वंदन करते हुए नगरवासियों का सौभाग्य बताया।

-डॉ. सुनील जैन संचय,ललितपुर मीडिया प्रभारी




3 Comments


Recommended Comments

Join the conversation

You can post now and register later. If you have an account, sign in now to post with your account.

Guest
Add a comment...

×   Pasted as rich text.   Paste as plain text instead

  Only 75 emoji are allowed.

×   Your link has been automatically embedded.   Display as a link instead

×   Your previous content has been restored.   Clear editor

×   You cannot paste images directly. Upload or insert images from URL.

×
×
  • Create New...