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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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जरा याद करो कुर्बानी कार्यक्रम में अमर बलिदानी शहीद परिवारों के वर्तमान वंशजों का खजुराहो में आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के सानिध्य में 21 अक्टूबर को होगा  "स्वराज सम्मान" 


राष्ट्रहित चिंतक आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के सानिध्य में होगा एक अभूतपूर्व अश्रुतपूर्व कार्यक्रम 

जरा याद करो कुर्बानी

 

इस कार्यक्रम में अमर बलिदानी शहीद परिवारों के वर्तमान वंशजों को आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के सानिध्य में "स्वराज सम्मान" से सम्मानित किया जाएगा इस कार्यक्रम में निम्नलिखित शहीद परिवारों ने शामिल होने की स्वीकृति प्रदान की है -

 

  • राणा प्रताप
  • रानी लक्ष्मी बाई
  • मंगल पांडे
  • नाना साहिब
  • तात्या टोपे
  • बहादुर शाह जफर
  • भगत सिंह
  • चंद्रशेखर आजाद
  • सुखदेव
  • राजगुरु
  • अशफाक उल्ला खान
  • सदाशिवराव मलकापुर कर
  • श्रीकृष्ण सरल
  • सुभाष चंद्र बोस के अंगरक्षक कर्नल मोहम्मद निजामुद्दीन


इत्यादि 【21 अक्टूबर 1934- नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिंद फौज की स्थापना सिंगापुर में की थी।】

आजादी मिलने के बाद आजादी के दीवानों का मेला जरा याद करो कुर्बानी 21 अक्टूबर 2018 दिन रविवार दोपहर 1:45 खजुराहो, मध्य प्रदेश |

आयोजक - चातुर्मास समिति एवं सकल दिगंबर जैन समाज

5 Comments


Recommended Comments

भारत की दूसरी फांसी सरेआम हांसी, हरियाणा में लाला हुक्म चंद जैन और उनके नाबालिग भतीजे को दी गयी थी। इनकी लाश को जलाने के स्थान पर अपमान करने के लिए दफनाया गया था।


जैन स्वतंत्रता सेनानियों का भी सम्मान होना चाहिए

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राष्ट्रीय स्वाभिमान के गवाक्ष स्वतंत्रता के अम्र बलिदानी शहीदों के प्रति संभवत पहली बार अद्भुत आयोजन की अनुमोदना

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बहुत अच्छा, ज्यादा से ज्यादा शहीदो के परिवारों को इसमे शामिल किया जाये, बीना दास जो की पश्चिम बंगाल से सम्बंंध रखती थी, ने उस समय के गवर्नर जनरल पर 7 राउंड फायर किए थे पर वो वच गया था ! अगर हो सके तो इनके परिवार को जरूर बुलाया जाये

Edited by अशोकगौरव जैन
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“I confess that I fired at the Governor on the last Convocation Day at the Senate House. I hold myself entirely responsible for it. My object was to die, and if I had to die, I wanted to do it nobly, fighting against this despotic system of government which has kept my country in perpetual subjection to its infinite shame and endless sufferings, and all the while fighting in a way which cannot but tell. I fired at the Governor impelled by my love for my country which is being repressed and what I attempted to do for the sake of my country was a great violence on my own nature too.”

Bina Das

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