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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

भोजन करने का समय


संयम स्वर्ण महोत्सव

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सूर्योदय से घण्टे पीछे, घण्टे पहले दिनास्त से।

भूख लगे जोर से तभी खाना निश्चित यह आगम से॥
अरविकाल में भोजन करना मनुज देह के विरुद्ध है।

जो कि रात्रि में भोजन करता उसको कहा निशाचर है॥६०॥


मिट्टी कंकर आदि से रहित योग्य रीति से बना हुआ।

यथाभिरूचि खाया जावे वह जिस का दुर्जर भाव मुवा॥

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