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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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एकजुट हो - आचार्य विद्यासागर जी द्वारा रचित हायकू ४९२


संयम स्वर्ण महोत्सव

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492.jpg

 

एकजुट हो,

एक से नहीं जुड़ो,

बेजोड़ जोड़ो |

 

हायकू जापानी छंद की कविता है इसमें पहली पंक्ति में 5 अक्षर, दूसरी पंक्ति में 7 अक्षर, तीसरी पंक्ति में 5 अक्षर है। यह संक्षेप में सार गर्भित बहु अर्थ को प्रकट करने वाली है।

 

आओ करे हायकू स्वाध्याय

  • आप इस हायकू का अर्थ लिख सकते हैं
  • आप इसका अर्थ उदाहरण से भी समझा सकते हैं
  • आप इस हायकू का चित्र बना सकते हैं

लिखिए हमे आपके विचार

  • क्या इस हायकू में आपके अनुभव झलकते हैं
  • सके माध्यम से हम अपना जीवन चरित्र कैसे उत्कर्ष बना सकते हैं ?
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6 Comments


Recommended Comments

एक जुट हो मतलब सब एक साथ रहे पर किसी एक के साथ या एक ही से जुड़ कर नही रहे बल्कि सभी से इस तरह जुड़ जाए कि वह बेजोड़ हो जाये ।जब आप सभी से जुड़ जाएंगे तो उसे कोई अलग नही कर सकता।वह जोड़ मजबूत हो जाता है बेजोड़ हो जााता है।

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सभी स्वार्थो से ऊपर उठकर सबका हो जा  तभी तू अपनी आत्मा से जुड़कर बेजोड़ हो जाएगा

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एक जूट हो मतलब एक दुसरे के साथ  हम कोई धर्म कार्य करें तो मिलकर करें वो भी एक के नही बहुतों के मतलब असंख्यो के साथ मिलकर करें 

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ऐसे जुड़ो कि हम बेजोड़ हो जाएं बचपन में हमने सभी ने एक लघु कथा सुनी थी उसमें एक गरीब किसान के 5:00 पुत्र थे उसने अपने अंतिम समय में पांचों को बुलाकर एक एक लकड़ी लाने को कहा और फिर  एक एक को तोड़ने के लिए कहा तो वह लकड़ियां आसानी से टूट गई किसान ने फिर पांचों पुत्रों को  एक एक लकड़ी लाने को कहा और बड़े पुत्र को इन लकड़ियों को रस्सी से बांधने को कहा फिर पांचों पुत्रों को बारी बारी से तोड़ने के लिए कहा अब वह लकड़ियां तोड़ना संभव नहीं था यही संदेश आचार्य श्री इस हाइकु के माध्यम से शायद देना चाहते हैं जय जिनेंद्र

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एक और एक ग्यारह होते है अगर समाज मे एकता है तो सभी धार्मिक कार्य निविध्न पूर्ण हो जाते है एक से कुछ भी नही होता जंगल मे एक लकड़ी भी अच्छी नही लगती अकेला प्राणी हॅसता भी रोता भी अच्छा नही लगता जैजिनेन्द्र 

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