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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

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कर्म क्या होते हैं !

चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान दिगम्बर जैन आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की संसार में सबसे ज्यादा इमानदार हैं तो वह है कर्म | मुनि हो, गृहस्थ हो, राजा हो या रंक हो, युवा हो या वृद्ध हो कर्म किसी के साथ पक्षपात नहीं करते, जीव जैसा कर्म करता है वैसे ही उसे  फल मिलता है | जिसके द्वारा आत्म परतंत किया जाता है, उसे कर्म कहते हैं | जीव और कर्म का अनादिकाल से सम्बन्ध चला आ रहा है | मैं हूँ इस अनुभव से जीव जाना जाता है | संसार में कोई गरीब है, कोई अमीर है, कोई बुद्धिमान है , कोई बु

माँ,डाक्टर, वकील , गुरु को बतायें !

चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान दिगम्बर जैन आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की आज विज्ञान ब्रह्माण्ड की खोज कर रहा है | हर बात में विस्फोट करता है | कई लोगो ने समर्थन भी दिया है | पृथ्वी की रचना भगवान् ने कैसे की है यह खोज की है 27 किलोमीटर की सुरंग में की है खोज लेकिन हमें तो नहीं लगता है की यह ठीक है | योग्य का ग्रहण ही अयोग्य को त्याग है | थेओरी तो ज्यादा पढते हैं लेकिन प्रेक्टिकल (प्रयोग) नहीं करते हैं | रोटी में नज़र न लग जाये इसलिए काले धब्बे हैं ऐसा एक व्यक्ति ने कहा अप

भाव नगर में जहाज तोड़ते है !

चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ में विराजमान दिगम्बर जैन आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की शरीर का त्याग करना सुख, शांति की प्राप्ति का कारण है ! उसके तीव्र वेदना होने पर जीवन की आशा नष्ट हो जाती है ! मुक्ति को खोजने वाला साधू परिग्रह को मन, वचन, काय से त्याग कर देता है ! गाडी में पेट्रोल सप्लाई बंद कर दो तो सब ठीक हो जाता है ! हांथी को भी जब मद आता है तो तीन उपवास करवा देते हैं तो ठीक हो जाता है ! जैसे परीक्षा देना कठिन है ऐसे ही संलेखना कठिन है ! अच्छे – अच्छे घबडा जाते हैं ! कितने भी हार्स पावर

रक्षाबंधन पर्व मनाया गया !

चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ में विराजमान दिगम्बर जैन आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की ज्ञात हो – दिगम्बर जैन धर्म के अनुसार रक्षाबंधन के दिन 700 मुनिराजों का उपसर्ग (विघ्न) दूर हुआ था | विष्णु कुमार मुनि ने रिद्धियों के द्वारा किया था उसी की ख़ुशी में यह पर्व मनाया जाता है | आज के दिन मंदिर में पैसा दान करके राखी लेकर बांधते हैं और भाई की कलाई पर बहिन राखी बांधती है | आज के दिन चन्द्रगिरि में प्रतिभा स्थली की ब्रह्मचारिणी बहिने एवं छात्राओं ने आचार्य श्री के शास्त्रों की चौकी पर भी राखी बाँधी

शब्द की यात्रा तीन लोक तक होती है !

चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की उचित स्मृति रहती है तो विषयांतर नहीं होता है ! यह समझ भी आ जाता है की ठोस ज्ञान कितना है ! आप कई पृष्ठ पढ़ लो लेकिन उपयोग में नहीं आया तो क्या मतलब ! प्रतिभा संपन्न विद्यार्थी हमेशा परीक्षा को लेकर अलर्ट रहता है ! खूब लिखने से भी कुछ नहीं होता सही लिखोगे तो ही नंबर मिलेंगे ! शब्द जो आप बोलते हैं तीन लोक तक जाता है ! नदी कभी घर तक नहीं आती हमें जाना पड़ता है ! लोग कहते हैं नल आ गया पर नल तो वहीं रहता है ! आज लोग चाहते हैं

इंटरव्ह्यु में क्रीम बच जाती है !

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ में विराजमान दिगम्बर जैन आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की आयु के थोडा रह जाने पर आहार ग्रहण करने पर भी शरीर नहीं ठहरता! एक बार श्रधा के नष्ट हो जाने पर उसका पुनह प्राप्त होना दुर्लभ है ! तप में दोष लगने पर बहुत निर्जरा नहीं हो सकती ! बड़ा धंधा करने में जैसे बड़ी पूंजी लगती हैं उसी प्रकार संलेखना में पूरी शक्ति लगानी पड़ती है ! प्रशासन सम्बन्धी परीक्षाओं में संकेत दिया जाता है की तयारी करें और लाखों की संख्या में परीक्षार्थी परीक्षा में बैठते हैं लेकिन उसमे से लगभग 10

डायमंड की भांति है धर्म !

चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की वचनों की प्रमाणिकता वक्ता की प्रमाणता से आती है ! आचार्य श्री जी ने अनेक दृष्ठांत देते हुए समझाया की जब तैरना सीखते हैं तो लकड़ी का सहारा लेते हैं ! इसी प्रकार मोक्ष मार्ग में कई चीजों का सहारा लेना पड़ता है ! अपने किये हुए अनर्थों पर रोने से अन्दर ही अन्दर जलने से, पश्चाताप करने से पाप कम होते हैं ! यह धर्म हीरे ( डायमंड )  की भांति है उसे अच्छे ढंग से पालन करो ! आत्मा की अनुभूति श्रधान के माध्यम से होती है ! जितना आप क

ड्रेस और एड्रेस अलग – अलग होते हैं !

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ में विराजमान दिगम्बर जैन  आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की गुरुओं के सन्मुख आलोचना करके अपने व्रतों की अच्छी तरह विशुधि  करते हैं ! संयम के लिए पिच्छी ग्रहण करते हैं ! शरीर से ममत्व छोड़कर चार प्रकार के उपसर्ग को सहते हैं ! दृढ धैर्यशाली तथा निरंतर ध्यान में चित्त लगते हैं ! जैसे कक्षा में छात्र पास होते जाते हैं तो निकलते जाते हैं और छात्रों का प्रवेश होता रहता है, ऐसा ही संघ में होता है ! उच्च साधना के लिए अलग व्यवस्था होती है, जैसी व्यवस्था अस्पताल में होती है वैस

एक दिन में इंजिनियर नहीं बनते !

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान दिगम्बर जैन आचार्य श्री  विद्यासागर महाराज जी  ने कहा की किसने कहा हम गृहस्थों को दीक्षा नहीं देते, देखकर दे सकते हैं ! ३० वर्ष दीक्षा का समय लिखा है क्योंति ३० वर्ष तक ऊंचाई शरीर में वृद्धि होती है ! एक दिन में ही इंजिनियर बनता है क्या कोई ? कई – कई एक्साम देने के बाद बनते हैं ! आज कालेजों की भरमार हो गयी है ! उन मुनिराजों को विक्रिया – चारण और क्षीरा – स्रवित्व आदि रिधियाँ उत्पन्न होती है किन्तु राग का अभाव होने से उनका प्रयोग नहीं करते ! थोड़ी सी

मिलट्री जैसी होती है मुनि चर्या !

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी कहते है की अपना हित करना चाहिए, यदि शक्ति हो तो पर का हित भी करना चाहिए, किन्तु आत्महित और पर हित में से आत्महित अच्छे प्रकार से करना चाहिए ! प्राणी संयम को पालने के लिए और जिनदेव का प्रतिरूप रखने के लिए पिच्छि (मोर पंख की बनी) रखते हैं ! शरीर का संस्कार नहीं करते, धैर्य बल से हीन नहीं होते ! रोग से या चोट आदि से उत्पन्न हुई वेदना का प्रतिकार नहीं करते, मौन के नियम का पालन करते हैं, यह होती है मुनि की साधना ! आचार्य श्री

बहुत रोचक वर्णन है भगवान् का ! 

प्रभु का जन्मोत्सव लोक रूपी घर में छिपे हुए अन्धकार के फैलाव को दूर करने में तत्पर होता है ! अमृतपान की तरह समस्त प्राणियों को आरोग्य देने वाला है ! प्रिय वचन की तरह प्रसन्न करता है ! पुण्य कर्म की तरह अगणित पुण्य को देने वाला है ! प्रभु का जन्म होता है तो तहलका मच जाता है तीनो लोको में ! निरंतर बजने वाली मंगल भेरी और वाद्यों की ध्वनि से समस्त भुवन भर जाता है ! भगवान् के जन्म के समय इन्द्र का सिंहासन कम्पायमान हो जाता है ! भेरी के शब्द को सुनकर इन्द्रादि प्रमुख सब देवगण एकत्र हो जाते हैं ! जन्मा

दिल्ली नहीं दिल जीतो ! 

चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान दिगम्बर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की भिक्षा के लिए जाते समय सावधानी रखना चाहिए! त्रस और स्थावर जीवों को पीड़ा न पहुचे इसलिए अन्धकार में प्रवेश नहीं करते हैं ! आत्मा की विराधना नहीं होनी चाहिए, इधर – उधर अवलोकन करके घर में प्रवेश करना चाहिए संयम की विराधना न हो यह ध्यान रखना चाहिए ! वंदना करने वालों को आशीर्वाद देते हुए निकलते हैं साधू ! आहार के समय कोई नियम (विधि लिकर) जिनमन्दिर आदि से आहार के लिए निकलते हैं !   इतिहास उपहास का प

धन के नष्ट होने से दुःख होता है ! 

चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी कहते हैं की भगवान् के वैराग्य रूपी हवा के झकोरों से इन्द्र का सिंहासन कम्पित होता है ! तब इन्द्र अवधि ज्ञान रूपी दृष्ठि का उपयोग करके भगवान् के द्वारा प्रारंभ किये जाने वाले कार्य को जानता है ! सौधर्म इन्द्र के पास ही मोबाइल नंबर रहता है उसी के पास यह रेंजे है जिसका सम्बन्ध हो जाता है ! इसी प्रकार अवधि ज्ञान का होता है ! सौधर्म इन्द्र सिंहासन से उठ , जिस दिशा में भगवान् है , उस दिशा की ओर सात पद चलकर नमस्कार करता है ! सम

भाग्यसंपदा में भी सार नहीं है ! 

चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान दिगम्बर  जैन आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की सभी जिन्देवों का अभिषेक कल्याणक बड़ी विभूति के साथ मनाया जाता है ! इन्द्र की आज्ञा से कुबेर उनके लिए अंगराग, वस्त्र, भोजन, वाहन, अलंकार आदि सम्पति प्रस्तुत करता है ! मन के अनुकूल क्रीडा करने में चतुर देव कुमारों का परिवार रहता है ! वह चक्र के माध्यम से देव, विद्याधर और राजाओं के समूह को अपने अधीन कर लेते हैं ! काल, महाकाल आदि नौ निधियां उनके राजकोष में उत्पन्न होती हैं ! चक्ररत्न आदि 14 रत्न होते ह

वैज्ञानिक भी मानते हैं उपवास को श्रेष्ठ !

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जैसा साधक मिलना कठिन है इस काल में! वे गर्मी में बहुत दिनों तक कमरे में स्वाध्याय करते थे जहाँ का तापमान 46 डिग्री के आस-पास था और अभी रात में दहलान में खुले में शयन करते हैं कई बार बारिश के कारण ठंडा भी हो जाता है मौसम फिर भी वह खुले में ही रहते हैं वह शाम से सुबह तक एक ही पाटे पर रहते हैं चलते – फिरते नहीं हैं अँधेरे में ! उनके संघ के सभी साधू मौन साधना में रत हैं 02 जुलाई से 02 सितम्बर 2012 तक की मौन साधना गुरु के उपदेश से सभी साधू पालन कर रहे हैं ! मुनि श्री

गुरु की सेवा महान कार्य है ! 

चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान दिगम्बर जैन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कहा की गुरु के पीछे इस प्रकार बैठे की अपने हाँथ पैर आदि से गुरु को किसी प्रकार की बाधा न पहुचे ! आगे बैठना हो तो सामने से थोडा हटकर गुरु के वाम भाग में उधतता त्याग कर और अपने मस्तक को थोडा नवाकर बैठे आसन पर गुरु के बैठने पर स्वयं भूमि में  बैठे ! गुरु के नीचे आसन पर सोना जो ऊँचा नहीं हो ऐसे स्थान में सोना , गुरु के नाभि प्रमाण पात्र भूभाग में अपना सिर रहे इस प्रकार सोना ! अपने हाँथ पैर वगरह से गुरु आदि का

अनुराग को भक्ति कहते हैं !

चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान दिगम्बर जैन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कहा की जो तप में अधिक है उनमे और तप में भक्ति और जो अपने से तप में हीन है उनका अपरिभव यह श्रुत के अनुसार आचरण करने वाले साधू की तप विनय है ! मुख की प्रसन्नता से प्रकट होने वाले आंतरिक अनुराग को भक्ति कहते हैं ! जो तप में न्यून है उनका तिरस्कार नहीं करना ! देखने से भगवान् नहीं दीखते आँखे बंद करलो तो दिख जायेंगे रूचि होना चाहिए तभी  दीखते हैं  भगवान्  ! गुरु आदि के प्रवेश करने पर या बाहर जाने पर खड़े होना, व

शरीर दुःख का कारण है !

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान दिगम्बर जैन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कहा की आत्मा और शरीर के प्रदेश परस्पर मिलने से आयु कर्म के कारण यद्यपि शरीर ठहरा रहता है तथापि शरीर सात धातु रूप होने से अपवित्र है, अनित्य है, नष्ट होने वाला है, दुःख से धारण करने योग्य है, असार है, दुःख का कारण है, इत्यादि दोषों को जानकार “न यह मेरा है न मैं इसका हूँ” ऐसा संकल्प करने वाले के शरीर में आदर का अभाव होने से काय का त्याग घटित होता ही है ! शरीर के विनाश के कारण उपस्थित होने पर भी कायोत्सर्ग करन

भारत में संस्कृति का पतन हो रहा है !

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में आयोजित धर्मसभा को सम्भोधित करते हुए दिगम्बर जैन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कहा की दादी माँ ने कहानी कही छोटी – छोटी पर कहानी कहीं लिखी नहीं है ! कुछ युवा बालक उसे समझने का प्रयास करें ऐसी ही जिनवाणी की कहानी है ! उसे समझने का प्रयास करें ! “मन के जीते जीत है और मन के हारे हार है ” याने मन के अन्दर पावर है ! हमारी उर्जा बाहर लग रही है उसे भीतर लगाये ! आज मंत्र का नहीं यन्त्र का उपयोग हो रहा है ! भोतिक विज्ञान से ज्यादा आत्मिक विज्ञान जरुरी है ! शोध करने व

दंड से उदंडता ठीक होती है ! 

चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान दिगम्बर जैन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कहा की दंड के माध्यम से उदंडता ठीक हो जाती है ! शुद्धी के प्रावधान हैं प्रतिक्रमण आलोचना ! जो क्षेत्र संयम को हानि पहुचाते हैं अथवा संक्लेश उत्पन्न करते हैं उसका त्याग क्षेत्र प्रत्याख्यान कहलाता है ! घर में महिलाओं के लिए निर्वाह करना पड़ता है कर्त्तव्य निभाने पड़ते हैं ! अपने द्वारा पहले किये गए हिंसा आदि को “हां मैने बुरा किया, हां मैने बुरा संकल्प किया, हिंसा आदि में प्रवर्तन वाला वचन बोला” इस प्र

आप क्वांटिटी नहीं क्वालिटी देखें !

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कहा की इस चातुर्मास की स्थापना का समर्थन इन्द्र भी कर रहे हैं जब वर्षा के साथ यदि धर्म वर्षा भी हो जाए तो ये अच्छा रहेगा ! मुनिराज अहिंसा धर्म के पालन एवं जीव रक्षा के लिए करते हैं चातुर्मास ! आज हम वनों में नहीं रह पाते हैं तो यहाँ स्थापना करना पड़ रहा है ! हमारी स्थापना तो 2 जुलाई 2012 को हो गयी थी श्रावको ने आज कलश स्थापना की है ! आज हमें जल छानने के संस्कार देने चाहिए ! रस्सी , कलशा, छन्ना हमेशा बाहर जाते समय साथ म

जीवन का निर्वाह नहीं निर्माण करना है !

वीर शासन जयंती एवं प्रतिभा स्थली के बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम दिखाए ! चंद्रगिरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान दिगम्बर जैन आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की प्रतिभा स्थली के बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम दिखाए शीत, हवा, पौधे, आदि के रूप में मुखोटा लगाकर कार्यक्रम प्रस्तुत किया ! “मै राष्ट्रीय पशु न सही लेकिन राष्ट्रीय संत की गाये हूँ” “बच्चों ने कहा की आचार्य श्री कहते हैं की मंदिर में लगने वाले पत्थर की चीप बनो चिप नहीं चीफ (मुख्य) है ! प्रतिभा स्थली में

छात्र – छात्राओं को विशेष प्रवचन संसार में सबसे बड़ी बीमारी तनाव है !

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कहा की प्रतिभा स्थली में शिक्षिकाओं को संख्या ज्यादा और छात्राओं की संख्या कम है आप लोग संख्या बढाएं खर्चा ज्यादा हो और काम कम यह ठीक नहीं है ! किसका मन प्रतिभा स्थली में नहीं लग रहा है हाँथ उठायें ! जिनका मन नहीं लग रहा उनका सहयोग करें जिनका मन लग रहा है ! आचार्य श्री ने बच्चों से चर्चा भी की ! जिस प्रकार सब विषयों में नंबर मिलते हैं वैसे ही खेल कूद में भी नंबर आना चाहिए ! सब लोगों की पढाई ठीक चल रही है ? सब पढ़ाते ठी
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