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  • परम पूज्य 108 आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज का अर्घ

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    वैराग्य मूर्ति देख के मन शान्त होता।
    जो भेद-ज्ञान स्वयमेव सु जाग जाता।।
    विश्वास है वरद हस्त हमें मिला है।
    संसार चक्र जिसमें भ्रमता नहीं है।।

    ऊँ ह्रीं श्री 108 आचार्य ज्ञान सागराय अनर्ध्यपद प्राप्तर्य अर्ध्य नि0 स्वाहा।



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    रतन लाल

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    ऊं विद्यासागराय नम:

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    Padma raj Padma raj

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    भगवान्  तो भगवान्  के  सामने हैं ।

    FB_IMG_1508824681217.jpg

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