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    १७. विनयांजली- आचार्य भगवन के पूरे प्राणी मात्र के प्रति उपकारों के लिये कृतज्ञता स्वरूप |

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    सभी आचार्यों को नमन  -अभिषेक जैन स-परिवार

    आचार्य भगवन के चरणों में सत-सत वंदन अभिनन्दन नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर

    चार्यों को नमन

    लेयो हृदय में धार

    उपाध्याय का ध्यान 

    करे आत्म कल्याण

     

    सर्व-साधु उर में वसे

    नित उनके गुणगान

    नमोकार की जाप 

    सुख-शान्ति का मार्ग

     

    ईश्वर की प्रातः वन्दना

    शुभ भावों का द्वार

    कार्य धर्ममय हो सदा

    सुख-समृद्धी का आधार 

     

    मात-पिता के चरणों में 

    हो झुके शीश नित दिन

    शुभाशीश की छाया मिलें 

    खुलें भाग्यलक्ष्मी हर दिन

     

    बहनों के प्रति प्रेम हो

    उनपर प्रीत छलकाये

    बच्चों सम निर्मल बनें 

    निर्मल करे स्व-सुहाय

     

    प्राणी मात्र पर दया भाव

    स-हृदय प्रेम शुभ उद्गार 

    मोक्ष लक्ष्मी के वरन का

    सुन्दर सरल शुभ उपाय।।

     

    नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर

    -अभिषेक जैन स-परिवार

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