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  • आचार्य भग़वन के श्री चरणों में मेरी छोटी सी रचना

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    atishay jain
     
     
    विद्यागुरु  के दर्शन  का, रामटेकजी  बहाना  है | 
    गुरुवर  जब बुलाएंगे ,हमें दौड़े चले जाना है || 
    विद्यागुरु के  दर्शन  का। ..... 
     
    तुम्ही मेरे  माता  पिता ,तुम्ही बंधु  सखा | 
    दुनिया  वाले 
    दुनिया  वाले क्या  जाने ,मुझे  गुरु  ने  जाना  है || 
    विद्यागुरु के  दर्शन  का। ..... 
     
    सूरज में ढूँढा  तुम्हे ,चंदा  में  पाया है | 
    तारों  के 
    तारों  के झिलमिल  में  मेरे  गुरु का बसेरा  है || 
    विद्यागुरु के  दर्शन  का। ..... 
     
    कलियों में ढूँढा  तुम्हे ,फूलों में पाया है |
    धरती के कण कण पे 
    धरती के  कण कण पे  मेरे  गुरु का ठिकाना  है || 
    विद्यागुरु के  दर्शन  का। ..... 
     
    दुनिया  में ढूँढा तुम्हे ,हृदय  में पाया  है 
    भक्तों के 
    भक्तों के ह्रदय में मेरे गुरु का ठिकाना   है || 
    विद्यागुरु के  दर्शन  का। ..... 
    कुण्डलपुर की गलियों में गुरु गुरु गाऊँ  मैं | 
    सोनागिर की गलिओं में गुरु गुरु गाऊँ  मैं 
    बुंदेली के कण कण ने 
    बुंदेली के कण कण ने  मेरे गुरु को निहारा है || 
    विद्यागुरु के  दर्शन  का....... 
     
    नगरी की गलियों में ,गुरु गुरु गाऊं मैं 
    दुनिया  वाले 
    दुनिया  वाले क्या जाने  अतिशय तो दीवाना  है || 
    विद्यागुरु के  दर्शन  का। ..... 
    ✍️✍️✍️✍️


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